यह खबर थी हमें पुरुषार्थ से शुभ दिन आते हैं

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यह खबर थी हमें पुरुषार्थ से शुभ दिन आते हैं

यह खबर थी हमें
पुरुषार्थ से शुभ दिन आते हैं
जिन्हें हम दान देते हैं
वह हमें अपना बनाते हैं

हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!
परिपूर्ण किया ब्रह्माण्ड
किया ब्रह्माण्ड
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!

सिन्धु से तुमने जल भरा
वर्षा से पुनः बरसा दिया
तुम्हीं ने भूमि मङ्गल बृहस्पति
शुक्र ग्रहों का रचा जहान्
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!

सूर्य चन्द्र प्रकाशित किए
गलीचा बिछाया हरी घास का
रङ्ग-बिरङ्गे सुगंधित कुसुम
बेल तरुओं के हो बागबान
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!

सोने चाँदी हीरों की खान
कूओं में स्वच्छ जल का दान
वह चन्द्र चाँदनी सूर्य का ताप
चमक भरी सितारों की शान
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!

पाते समृद्धि यज्ञकर्ता
उन्हें लौटाया ना खाली हाथ
जनता के सेवक याज्ञिक को
करते हो तुम ऐश्वर्यवान्
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!

‘सुगोपा’ जन दीनों के रक्षक
भावभीने देते हैं सुमन
तृप्त है जैसे घास से गौएँ
वैसे भक्त भी तुमसे भगवान्
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!

जाकर जलाशय में जैसे नहर
हो जाती है जलाशय की
ऐसे सब को भरने वाले
भर दो हमें भी कृपा निधान् !
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!
परिपूर्ण किया ब्रह्माण्ड
किया ब्रह्माण्ड
हे इन्द्र परम ऐश्वर्यवान् !!