बिना भूख के किसी समय भी भोजन खाना ना चाहिए।

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बिना भूख के किसी समय भी भोजन खाना ना चाहिए।

बिना भूख के किसी समय भी,
भोजन खाना ना चाहिए।
बिना मान के किसी मित्र के,
घर पर जाना ना चाहिए।
बिना थाय के जल के अंदर,
बढ़कर नहाना ना चाहिए।
बिना समझ के मिलें श्रोता,
“धर्मी”गाना ना चाहिए।

युवा अवस्था होय नार की,
बापू के घर करना ना।
नीच मनुष्य की करके नौकरी,
जीवन भर दुःख भरना ना।
दूर देश में”धर्मी”पैसे,
और के ढिंग में रखना ना।
युद्ध क्षेत्र में शत्रु सन्मुख,
पीठ दिखाकर मारना ना।

जो जन फंसा अविद्या अंदर,
उसकी होती ख्वारी है।
होय स्मिता”धर्मी”जिसमें,
जीवन रहे दु:खारी है।
राग द्वेष जिन जन में व्यापे,
विपता भरता भारी है।
अभीनिवेश के डर से व्याकुल,
देखी दुनियां सारी है।

तन हो सुंदर वस्त्र स्वच्छ हों,
ऐसा जन प्रचारी हो,
वाणी में रस ऐसा होवे,
सुनें मगन नर नारी हो।
विद्या हो,और धन हो इतना,
जीवन सदा सुखारी हो।
“धर्मी”पांचों बातें हो,
तब जनता पीछे सारी हो।