जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
है धर्म मेघ तो होगा वर्षण
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
वृक्ष के वश की बात नहीं है
फल के आगमन में रोक नहीं है
उमड़ेगा छाती से माता का दूध
उसके उमड़न में रोक नहीं है
दूध का प्यासा है बच्चे का मन
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
ऐसे ही सन्तों का है आत्मप्रसाद
आध्यात्मिक संजीवनी है उनके पास
धर्म-मेघ बन के बरसेगा अगाध
मेघ तो बरसेगा, झूमेगा साथ
होगी प्रकाशित धर्म की ये जगन
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
शाख लदी फल से, दूध भरी गाय
आध्यात्मिक रस से योगी सरसाये
नव प्रसूता मात-हृदय ममता मन भाए
ममता का आंचल शिशु को उड़ाए
दु:ख सहे, कष्ट सहे, मार्मिक ममतापन
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
बौर आम की दे मस्त सुगन्ध
दी सुनाई उसमें कोयल की धुन
मेघों की गर्जन नाच उठे मोर
किरणों का आगम कलरव को सुन
बन सुगन्ध, फल, किरण या घनक-घन
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
है धर्म मेघ तो होगा वर्षण
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न
है धर्म मेघ तो होगा वर्षण
जीवन से जीवन होता है उत्पन्न










