वृत्र-वध के लिए इन्द्र आगे करें
वृत्र-वध के लिए
इन्द्र आगे करें
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
करना है लक्ष्य को
हमें पूर्ण सफल
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
वृत्र-वध के लिए
काम इच्छा व स्वार्थ है
पापों की जड़
हो जाए आत्मप्रकाश
ऐ मानव ! आगे बढ़
आत्मराज्य हो जाए
तो इन्द्रियाँ जाएँ तर
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
वृत्र-वध के लिए
आत्मसूर्य के ओज से
तम हो तमाम
देवता कहते हैं
आत्मशक्ति है महान्
वाणीयाँ कर लें स्तुति
मन्त्रोपदेश सुनें कान
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
वृत्र-वध के लिए
आओ वृत्र का करें
हम समूल विनाश
आत्मिक ओज जगाएँ
प्रार्थना स्तुतियों के साथ
पाप दुरितों को आने
ना दें अपने पास
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
वृत्र-वध के लिए
इन्द्र आगे करें
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
करना है लक्ष्य को
हमें पूर्ण सफल
इसलिए इन्द्र आत्मा पुरोहित बने
वृत्र-वध के लिए










