आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं
इन्द्र प्रभु तो परम शुद्ध पवमान हैं
साम-गान के द्वारा करें भक्ति
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं
अक्षर, मात्रा, छंद, तान, आरोह, अवरोह
सब दृष्टि से होवे प्रभु से संयोग
सुन के शुद्ध संगीत की लहरियाँ
आविर्भूत हृदय में होंगे अधिपति
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं
आनन्द लेते हुए सङ्ग छेड़ेंगे तान
युगल संगीत लहरियाँ समा देंगी बाँध
यह तरंगित हृदय होगा संतृप्त शान्त
स्वरचित गद्य-पद्य भी देंगे खुशी
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं
गीत-रचना के सङ्ग होवे भाव विशुद्ध
सुन के प्यारे प्रभु जी करेंगे प्रबुद्ध
प्रभु के आशीष खिलाएँगे प्रेम-सुमन
और देंगे हमें वह सुख संसृति
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं
भाग्यशाली श्रेणी में तुम लाओ हमें
तेरे प्रेम की दृढ़ डोर ही में बंधें
तेरी आनन्द धाराओं में बहें
चहुं ओर से कर दो आह्लादित स्थिति
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं
इन्द्र प्रभु तो परम शुद्ध पवमान हैं
साम-गान के द्वारा करें भक्ति
आओ राजराजेश्वर की कर लें स्तुति
उनमें लवलेश भी मलिनता नहीं










