प्रेम से मिल कर चलो

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प्रेम से मिल कर चलो

प्रेम से मिल कर चलो,
बोलो सभी ज्ञानी बनो
पूर्वजों की भांति तुम,
कर्तव्य के मानी बनो

हों सभी के दिल तथा
संकल्प अविरोधी सदा
मन भरे हों प्रेम से
जिससे बढ़े सुख सम्पदा

हों विचार समान सबके
चित्त मन सब एक हों
ज्ञान देता हूँ बराबर
भोग्य पा सब नेक हों


हे प्रभो ! तुम शक्तिशाली
हो बनाते सृष्टि को
वेद सब गाते तुम्हें हैं,
कीजिये धन वृष्टि को