अग्नि देव से आके जुड़ ले

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अग्नि देव से आके जुड़ ले

अग्नि देव से आके जुड़ ले
जिसने अदिति को जोड़ा हमसे
जिससे मात-पिता के दर्शन
हम कर पाए आके जग में
अग्नि देव से आके जुड़ ले

वायु अग्नि रवि शशि पृथ्वी
अदिति की देन
दान अग्नि देव का पाया
हुआ जग-क्षेम
मर के जन्म लेते पाते


अदिति की गोद
जीव का कराते मात
पिता से यूँ योग
गुण से महिमाशालिनी है वो
इसलिए तो मही वो
नए-नए इसमें गुण भी
नई-नई शक्तियाँ भी
करते आए वैज्ञानिक भी


कई खोज कब से
अग्नि देव से आके जुड़ ले
जिसने अदिति को जोड़ा हमसे

अदिति के गर्भ से पाया
हमने भी सूर्य
कृपालु यह सोमचन्द्र
करे कार्य पूर
प्राण दाता वायु आया


अदिति के उदर से
झिलमिलाते तारागण
शाश्वत स्वर से
उमड़ घुमड़ बादल भी बरसे
विद्युत माला इनमें चमकें
इन्द्रधनुष के रङ्गों से
हर्ष जागे मन में


झरते झरने कल कल नदियाँ
जा मिलीं समुद्र से
अग्नि देव से आके जुड़ ले
जिसने अदिति को जोड़ा हमसे

हिम-मण्डित शीतल पर्वत
की उत्तुङ्ग शाखाएँ
उग रही है उन पर सघन
वन की मालाएँ
जल का भण्डारी विस्तृत


साररूप सागर
उछलती मचलती तट पर
तरङ्गे बिछाकर
रङ्ग-बिरङ्गे फूलों से
धरती भी सजा दी
हरियाली की चादर
धरा पे बिछा दी


कूंके सुनते कोयलों की
गुञ्जित ध्वनियाँ भ्रमरों की
अग्नि देव से आके जुड़ ले
जिसने अदिति को जोड़ा हमसे
जिससे मात-पिता के दर्शन
हम कर पाए आके जग मे