श्रद्धा स्नेह और भक्ति भाव में सदा ही आहुत होते ईश्वर
श्रद्धा स्नेह और भक्ति भाव में
सदा ही आहुत होते ईश्वर
तभी प्रकाशमान् प्रभु होवें
स्तुत्य हृदय-सदन के भीतर
श्रद्धा स्नेह और भक्ति भाव में
सदा ही आहुत होते ईश्वर
घृत की आहुति श्रद्धा व प्रेम से
पावक अग्नि में जलती है
हो प्रज्वलित यज्ञ कुण्ड में
हवि को प्रकाशित करती है
इसी तरह से भक्त-हृदय में
प्रकाशमान् हैं पृथु परमेश्वर
तभी प्रकाशमान् प्रभु होवें
स्तुत्य हृदय-सदन के भीतर
श्रद्धा स्नेह और भक्ति भाव में
सदा ही आहुत होते ईश्वर
शुद्ध पवित्र हैं पारु परमेश्वर
निज भक्तों को पावन करते
अन्धकार से दूर हटाकर
दिव्य प्रकाश हृदय में भरते
पाते रहें प्रकाश प्रभु का
यज्ञरूप जीवन में जी कर
तभी प्रकाशमान् प्रभु होवें
स्तुत्य हृदय-सदन के भीतर
श्रद्धा स्नेह और भक्ति भाव में
सदा ही आहुत होते ईश्वर










