अग्निरूप आत्मा से होवे शुभ दर्शन परमेश्वर का
अग्निरूप आत्मा से होवे
शुभ दर्शन परमेश्वर का
हर क्षण काल समय में होवे
अन्तर्ध्यान सर्वेश्वर का
अग्निरूप आत्मा से होवे
धन बन्धु पुत धरा सम्पदा
तन सौन्दर्य विनेश्वर हैं
उसमें अनुव्रत कभी न रहना
यह तो दु:ख के नश्तर हैं
अनुरत रहना प्रभु प्रेम में
पाना प्रेम जगदीश्वर का
अग्निरूप आत्मा से होवे
महायज्ञ परमेश्वर द्वारा
देवे उन्नति ज्ञान समृद्धि
प्रेम किया जिसने ईश्वर से
पाई उसने सात्विक बुद्धि
प्रेम शक्ति से दीप जलाएँ
प्रभु का मन के भीतर का
अग्निरूप आत्मा से होवे
एकमात्र हम सबका प्रभु ही
वरने योग्य सखा है हमारा
शुद्ध हृदय से रहें समर्पित
सदा रहे मन-चित उजियारा
उसे रिझायें नहीं गवाएँ
समय कभी भी पल भर का
अग्निरूप आत्मा से होवे
भक्त रहे जो सदा प्रकाशित
तेजवन्त हो आत्मग्नि से
विस्तृत ज्ञान को आत्मसात करें
विनयशील निज शक्ति से
परोपकार से उर्ध्वगमन हो
मेल हो भक्त और ईश्वर का
अग्निरूप आत्मा से होवे
आओ विश्व के प्रेमी लोगों!
निज आत्मग्नि को तुम प्रगटाओ
जिस सन्घर्ष से जागी है किरणें
मन-चित्त के आलोक जगाओ
भाव प्रशस्त विचार हों उत्तम
यही ध्येय हो जीवन का
अग्निरूप आत्मा से होवे
शुभ दर्शन परमेश्वर का
हर क्षण काल समय में होवे
अन्तर्ध्यान सर्वेश्वर का
अग्निरूप आत्मा से होवे










