जहाँ अविराम परमेश्वर का गुण गाया नहीं जाता

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जहाँ अविराम परमेश्वर का गुण गाया नहीं जाता

जहाँ अविराम परमेश्वर का
गुण गाया नहीं जाता
चपल मन संयमित शुद्ध
वहाँ पाया नहीं जाता

सजाता जा रहे ईश्वर का
पावन नाम रसना पर
उतर जाता है जब वो पाठ
तो दोहराया नहीं जाता

जहाँ इन्सान हरदम
वासना में लिप्त रहता हो
वहाँ इन्सानियत का लेश भी
पाया नहीं जाता

उसे इन्सान कहने में
मुझे तो शर्म आती है
कि जिस दिल में दया
ईश्वर का भय पाया नहीं जाता

गरीबी में मुझे दी आपने
सन्तोष सी दौलत
किसी के सामने यह हाथ
फैलाया नहीं जाता

पड़ेगा भोगना परिणाम
सबको अपने पापों का
किसी मजदूर से यह बोझ
उठवाया नहीं जाता

सजाता जा रहे ईश्वर का
पावन नाम रसना पर
उतर जाता है जब वो पाठ
तो दोहराया नहीं जाता

जहाँ अविराम परमेश्वर का
गुण गाया नहीं जाता
चपल मन संयमित शुद्ध
वहाँ पाया नहीं जाता