तेरे करम से बेनियाज़, कौन सी शय मिली नहीं

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तेरे करम से बेनियाज़, कौन सी शय मिली नहीं

तेरे करम से बेनियाज़
कौन सी शय मिली नहीं
झोली ही मेरी तङ्ग है,
तेरे यहाँ कमी नहीं

देने वाले के घर में, कमीं कुछ नहीं
पाने वाला न पाये, तो वो क्या करे
उसके खैरात-खाने, खुले हर जगह
समझ तेरी न आए, तो वो क्या करे
पाने वाला न पाये, तो वो क्या करे

उसने मानव जनम, तुझको हीरा दिया
मूल वेदों में सारा, बता भी दिया
ऐसे अनमोल जीवन को पाकर अरे
जो तू वृथा गँवाये, तो वो क्या करे

तुझको जीवन मिला, सबका उपकार कर
है ये अनमोल हीरा, न बेकार कर
नाम रोशन था करना, धर्म के लिए
जुल्म तू जो कमाये, तो वो क्या करे

दीन दुखियों के दिल को, दुखाने लगा
रात दिन पाप में, मन लगाने लगा
तूने जैसा किया, वैसा फल पा लिया
अब तू आँसू बहाये, तो वो क्या करे

पाने वाले ने पाया, अगर कुछ नहीं
देने वाले ने रक्खी, कसर कुछ नहीं
तेरे हाथों में दे दी है, सुन्दर कलम
नाम तू ना कमाये, तो वो क्या करे

देने वाले के घर में, कमीं कुछ नहीं
पाने वाला न पाये, तो वो क्या करे
समझ तेरी न आए, तो वो क्या करे