विश्वपति हो तुम मेरे दाता

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विश्वपति हो तुम मेरे दाता

विश्वपति हो तुम मेरे दाता
तुझसे अलग कुछ, जग में नहीं है
जड़ चेतन, सब तेरी है रचना
सत्ता तेरी ही सर्वोपरि है

आश्रय ही तेरा, मेरा सहारा
मिलता नहीं है, तुझ बिन किनारा
विश्व का तूने साज सजाया
तेरे बिना कोई मीत नहीं है

तुमने रचा है ये ब्रह्माण्ड सारा
तुम्हीं बल के दाता सबने पुकारा
तुम ही चलाते हो सन्सार सारा
तुम से अलग यहाँ कुछ भी नहीं है

धन दौलत सब तेरी है माया
अन्त समय में सबको दिखाया
तन मन और धन तुझसे ही पाया
ऋषियों ने ये बात जग में कही है

अज्ञान है मृत्यु, ज्ञान है जीवन
अनादि अमर तुम हे मेरे भगवन् !!
कर्मवीर ने ही जीता है जग को
“मिथलेश” जीना आसान नहीं है

विश्वपति हो तुम मेरे दाता
तुझसे अलग कुछ जग में नहीं है
जड़ चेतन सब तेरी ही रचना
सत्ता तेरी प्रभु सर्वोपरि है