आग जलाई ब्रह्मा ने यजमानों के लिए
आग जलाई ब्रह्मा ने
यजमानों के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
आहुतियों के प्रवाह फैले
इदं न मम के भाव जगे
अयंत इध्म आत्मा के भाव
इस आत्मा के भाव बढ़े
बनेंगे हम चिंगारी
तो ज़माने के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
इस ब्रह्माण्ड के परमाणु सब
एक हो गए दान के कारण
ऐसी आग की चिंगारी को
रोम-रोम में करने धारण
महायज्ञ करते ईश्वर
समझाने के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
परमात्मा की दसों दिशाएँ
विश्व याग में हो गई तत्पर
हर क्षण व्यापक यज्ञ की अग्नि
निष्ठित है निष्काम के पथ पर
यज्ञ भाव हैं उपासना
करवाने के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
यह आत्मा प्रभु इंधन तेरा
इसे जाज्वल्यमान बनाओ
पृथ्वी और द्युलोक की दो
समिधाएँ दूँ तो इन्हें जलाओ
दो समिधा स्वीकार करो
दो लोकों के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
तेरी ज़मी और आसमान को
पहले अपना घर तो बना लूँ
अग्निहोत्र करते-करते ही
छोड़ इसे परलोक सजा लूँ
विश्व दिया तूने सेवा
करवाने के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
विश्व को दे दूँ आत्मा मेरी
और आत्मा को विश्व विशाल
लोभ ना हो लेने में
ना देने में हो अभिमान उछाल
लेना हो जाए अब केवल
देने के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए
आग जलाई ब्रह्मा ने
यजमानों के लिए
देवपूजा संगतिकरण
शुभ दानों के लिए










