उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा

0
69

उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा

उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा,
परलोक का भी सुख, पड़ता है हेरना,
स्वाध्याय में लगे यह मन,
और करें मधुर मनन,
सुखानन्द को खेवना
उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा

अधिनियम सुख-दु:ख का,
प्रतिफल है कर्म का,
विरला ही मर्म जाने,
आत्मा के धर्म का,
ज्ञानी भेद को खोलें,
जो मानें, सो बोले,
प्रभु उसे करता है प्रतिपन्न
उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा

आत्मा की नित्यता,
और उसके हैं जन्म अनेक,
जिसको यह भान होता,
बनता वो सुचेत
पाप कर्म को वो छोड़े
पुण्य से नाता जोड़े,
पुरुषार्थी बनता अति अनुपम
उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा

आत्मा के चिन्तन में,
स्वाध्याय भक्त करे नित,
बनता है भक्त सूरि,
होता ईश पे आकर्षित,
आनन्द सुख में डोले,
परमेश्वर का हो ले,
यही मोक्ष-प्राप्ति का साधन,
उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा

करना लोक-उपेक्षा,
परलोक जाए सुधर,
स्वार्थ-लोभ तज के,
पापाचरण ना कर,
उन्नतियाँ दोनों ले ले,
कृपा के भरे ले झोले
नित कर लें प्रभु का आवाहन,
उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा,
परलोक का भी सुख पड़ता है हेरना,
स्वाध्याय में लगे यह मन,
और करें मधुर मनन,
सुखानन्द को खेवना
उत्तम प्रभु की शरण, देती है प्रेरणा