महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ?
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?
ना तुम सा कलाकार वेद बताएँ
तुम्हीं ने पदार्थ बहुमूल्य रच के
ये द्यु: पृथ्वी आकाश लोक सजाये
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?
पवन मिट्टी पानी अमोलक पदार्थ,
बिना इसके रहता यह जीवन अकारथ,
सुमन रहते सुरभित ये तरुओं के साये,
विविध अन्य औषधि से धरती सुहाये
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?
यहाँ सोना चाँदी लोहा हीरक है
खनिज कोयला और गंधक नमक है
उदधि सीपी मोतियों से भी भरे हैं
कषाय मधुर अम्ल, कटुरस चखाये
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?
यह ग्रह सूर्य चन्द्र, ये झिलमिल सितारे,
प्रकाशित ही रहते हैं प्रभु के सहारे,
यह पार्थिव कर्तृत्व भुलाया न जाए,
कलावित् प्रभु-महिमा कैसे गिनायें
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?
तू ही ब्रह्मा विष्णु है यमकाल शिव है,
अनेकों है गुण जिससे जग अनुशासित ,
तो फिर क्यों जगत तुझको टुकड़ों में बाटें,
तेरे नाम की आड़ में क्यूँ सताएँ
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?
ना तुम सा कलाकार वेद बताएँ
महत्ता तुम्हारी समझ कैसे पाएँ ?










