इन्द्रियाँ ज्योति इन्द्र देवता, इन्द्रियाँ करती हैं भला
इन्द्रियाँ ज्योति इन्द्र देवता
इन्द्रियाँ करती हैं भला
आत्मा की हैं यह प्रजा
कर्मों से आत्मा ने अपनी
देहपुरी को सजाया
जल भोजन वायु के सहारे
देह को जीवन मिला
पाँच इन्द्रियाँ निज कर्मों से
आत्म-अभीष्ट है पाता
तत्व सत्यता उपादेयता
है इन्द्रियों की कला
समीचीन इन्द्रियाँ सुखद हैं
उल्टी हो दु:ख लाए
स्वाद लालसा गर हो सीमित
देह का होता भला
दायित्व आत्मा का इन्द्रियों पे,
प्रियपद जो हैं दिलाते
उत्तम गति से सिद्धि प्राप्त कर
बनती ज्योति प्रदा
आत्मा के लिए देह-इन्द्रियाँ
आत्मा नहीं उनके लिए
आत्मा पाए मोक्ष का आनन्द
देह पाए अन्तशय्या
इन्द्रियाँ ज्योति इन्द्र देवता
इन्द्रियाँ करती हैं भला
आत्मा की हैं यह प्रजा










