तुम्हारी देखी कृपा, इन्द्र इस जमाने की
तुम्हारी देखी कृपा
इन्द्र इस जमाने की
ना भूल पाने की
बिना ही मूल्य दिए
अश्व-पवन पाने की
पवन को पाने की
तो और देखो के
गौएँ भी पुरुभोजा हैं
ये पुरुभोजा हैं
बस चारा-घास ही खातीं
अमृत की शोभा हैं
अमृत की शोभा हैं
यह गौ तो वाणी भी है
मधुर शब्द सुनाने की
मधुरता लाने की
तुम्हारी देखी कृपा
इन्द्र इस जमाने की
ना भूल पाने की
यह सोना चाँदी जवाहर
हीरे हैं इन्द्र की भेंट
हैं इन्द्र की भेंट
यह इन्द्र ही बनाता है
हमें घरों में सेठ
हमें घरों में सेठ
यही तो हो रही कृपा
सुखी बनाने की
सुखी बनाने की
तुम्हारी देखी कृपा
इन्द्र इस जमाने की
ना भूल पाने की
मगर जो दस्यु हैं
हमको सताया करते हैं
सताया करते हैं
हमारी सुख शान्ति धन
मिटाया करते हैं
मिटाया करते हैं
तो गाज मिटने की पड़े
या तो आर्य बनाने की
बदलाव लाने की
तुम्हारी देखी कृपा
इन्द्र इस जमाने की
ना भूल पाने की
हे इन्द्र कैसे भूलें
हम तेरे उपकारों को
तेरे उपकारों को
जो दिवस-रात हमें
दान दिए बहारों के
सुखद बहारों के
ना वाणी में शक्ति
महिमा को बताने की
कृपा बताने की
तुम्हारी देखी कृपा
इन्द्र इस जमाने की
ना भूल पाने की
बिना ही मूल्य दिए
अश्व-पवन पाने की
पवन को पाने की










