माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर सुख सौभाग्य प्रदाता

0
16

माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर सुख सौभाग्य प्रदाता

माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर
सुख सौभाग्य प्रदाता
परमानन्द सरस रस-दायक
भयभञ्जन सुखदाता


शिव मङ्गलकारक दिव्य गुणोध
आधि-व्याधि शामक हे सुबोध !
सुख-शान्ति की तुझसे है अभिलाषा
माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर
सुख सौभाग्य प्रदाता

कण-कण निवासक कल्याणकारी
परम पिता परमात्मा
तुम हो आत्माओं की आत्मा
सतत् प्रवाहित स्रोत तुम्हारा


सुख-सौभाग्य ले आता
जो शुद्ध समृद्ध बनाता
ऊपर की ओर ही उठकर
जाते हैं प्रभु की ही ओर
तुम बिन ना कोई दूजा


है सुख शान्ति का ठोर
सुख शान्ति की है तुझसे अभिलाषा
माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर
सुख सौभाग्य प्रदाता

धारणा ध्यान समाधि से करते
साक्षात्कार प्रभु का
दृत-दिव्य प्रभु है अनूठा
आत्मविभोर हो जाते ऐसे
सुख शान्ति देती ऋजुता


पा जाते आनन्द की वर्षा
उसे दिवस रात्रि हम पूजें
करें ध्यान नित प्रभु का
होने लगे फिर हमको
अनुभव वितत विभु का


सुख-शान्ति की तुझसे है अभिलाषा
माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर
सुख सौभाग्य प्रदाता
परमानन्द सरस रस-दायक
भयभञ्जन सुखदाता


शिव मङ्गलकारक दिव्य गुणोध
आधि-व्याधि शामक हे सुबोध !
सुख-शान्ति की तुझसे है अभिलाषा
माहिन आनन्दन् परब्रह्म परमेश्वर
सुख सौभाग्य प्रदाता