देखो प्रभु की कृपा, भूखे रहते ना हम
देखो प्रभु की कृपा
भूखे रहते ना हम
शाक, फल-फूल कन्द
औषधि खाते अन्न
होता रक्त का निर्माण
पुष्टि पाते अङ्ग-प्रत्यङ्ग
वन्द्य-विधाता वरुण
ना कहीं से भी कम
देखो प्रभु की कृपा
भूखे रहते ना हम
शाक, फल-फूल कन्द
औषधि खाते अन्न
भान्ति-भान्ति के अन्न
फल निर्माण किए
ना लिया मोल,
बीजों के दान दिए
जो दिया है सम्पूर्ण
ना अधूरा ना कम
पेट-भर खाते हम
भान्ति-भान्ति भोजन
देखो प्रभु की कृपा
भूखे रहते ना हम
शाक, फल-फूल कन्द
औषधि खाते अन्न
बंटवारा अन्नों का
सभ्य समाज करे
‘दीन’ रोटी का
क्यों इन्तजार करें ?
भूखे रह के जो
भूख की पीड़ा समझे
क्यों न खाएँ फिर
मिल बाँट के धान्य-अन्न
देखो प्रभु की कृपा
भूखे रहते ना हम
शाक, फल-फूल कन्द
औषधि खाते अन्न
सृष्टि-यज्ञ से करें
प्रभु सर्वस्व सम्पन्न
दिया प्रभु ने तो संचित
क्यों करें अन्न-धन
मेरे आत्मन्! उदार
तू बन दीन-अवन
दीन असहायों को
दे दे शस्त- शरण
देखो प्रभु की कृपा
भूखे रहते ना हम
शाक, फल-फूल कन्द
औषधि खाते अन्न
होता रक्त का निर्माण
पुष्टि पाते अङ्ग-प्रत्यङ्ग
वन्द्य-विधाता वरुण
ना कहीं से भी कम
देखो प्रभु की कृपा
भूखे रहते ना हम
शाक, फल-फूल कन्द
औषधि खाते अन्न










