माता निर्माण करने वाली होती है…

0
114

Table of Contents

माता निर्माण करनेवाली होती है

माता ही अपने बच्चे का निर्माण करनेवाली होती है। प्राचीन इतिहास में सबसे सुंदर उदाहरण मदालसा देवी का है। 🌿✨

मदालसा के तीन पुत्र हुए— विक्रांत, सुबाहु और अरिदमन। माता उन्हें लोरी देते हुए कहती—

श्लोक:
शुद्धोऽसि बुद्धोऽसि निरञ्जनोऽसि
संसारमायापरिवर्जितोऽसि ।
संसारमायां त्यज मोहनिद्रां
मदालसोल्लपमुवाच पुत्रम्।।

💡 भावार्थ:
“हे पुत्र! तू शुद्ध है, बुद्ध है, निर्दोष है, संसार की माया से रहित है। इस संसार की माया को त्याग दे। उठ, खड़ा हो, मोह को परे हटा।”

श्लोक:
शुद्धोऽसि रे तात न तेऽस्ति नाम
कृतम् हि यत् कल्पनयाधुनैव।

💡 भावार्थ:
“हे प्रिय पुत्र! तू शुद्ध स्वरूप आत्मा है, परंतु तेरा नाम (विक्रांत, सुबाहु, अरिमर्दन) मात्र कल्पना का ही एक स्वरूप है।”

इस शिक्षा का परिणाम क्या हुआ?


तीनों पुत्र राज-पाट का मोह त्यागकर वनों को चले गए। 🌿🏕️ यह स्थिति देख महाराज ने कहा—
“देवी! राज-पाट कौन संभालेगा, क्या सबको संन्यासी बना दोगी?”

🍼 जब चौथा पुत्र हुआ, तो मदालसा ने उसका नाम रखा— अलर्क
अब माता ने उसे राजनीति का उपदेश दिया। वह लोरी गाते हुए कहती—

श्लोक:
धन्योऽसि रे यो वसुधामशत्रु-
रेकश्चिरं पालयिताऽसि पुत्र !
तत्पालनादस्तु सुखोपभोगो
धर्मात् फलं प्राप्स्यसि चामरत्वम् ।।

💡 भावार्थ:
“हे पुत्र! तू धन्य है जो अकेला ही शत्रुओं से रहित होकर इस पृथ्वी का पालन कर रहा है। धर्मपूर्वक प्रजा-पालन से तुझे इस लोक में सुख और मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होगी।” 🏰⚖️

श्लोक:
राज्यं कुर्वन् सुहृदो नन्दयेथाः
साधून् रक्षंस्तात ! यज्ञैर्यजेथाः ।
दुष्टान्निघ्नन् वैरिणश्चाजिमध्ये
गोविप्रार्थे वत्स ! मृत्युं व्रजेथाः ।।

💡 भावार्थ:
“हे पुत्र! तू राज्य करते हुए अपने मित्रों को आनंदित करना, साधुओं की रक्षा करते हुए यज्ञ करना। गौ और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए संग्राम-भूमि में शत्रुओं को मौत के घाट उतारते हुए यदि मृत्यु आए, तो वह भी स्वीकार करना।” ⚔️🔥


आज की माताएँ अपने कर्त्तव्य को भूल चुकी हैं!

🔹 आज माता-पिता बच्चों को गोद में लेने से भी शर्माते हैं। बच्चे नौकरानी या आया की गोद में पलते हैं।
🔹 इसका परिणाम यह होता है कि बालकों का सही निर्माण नहीं हो पाता
🔹 घर के वातावरण, रहन-सहन, और आचार-विचार का गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है।

परिवार का माहौल कैसा होना चाहिए?


✅ जो माता-पिता स्वयं नमस्ते नहीं करते, उनके बच्चे भी शिष्टाचार नहीं सीखते।
✅ जिन घरों में माता-पिता देर से उठते हैं, वहाँ बच्चे भी देर से उठते हैं।
✅ यदि माता-पिता बीड़ी, सिगरेट, शराब, मांसाहार आदि का सेवन करते हैं, तो उनके बच्चे भी इन दुर्गुणों से बच नहीं सकते।
संध्या, यज्ञ, योगासन, और प्राणायाम का अभ्यास करने वाले परिवारों के बच्चे भी इन्हीं गुणों को अपनाते हैं।

क्या करना चाहिए?


✔️ माता-पिता को स्वयं अपने जीवन में परिवर्तन लाना होगा।
✔️ अपने आचरण से बच्चों को सीख देनी होगी।
✔️ बच्चों को सभ्य, सदाचारी और श्रेष्ठ मित्रों की संगति में रखना चाहिए।
✔️ दुराचारी, असभ्य और गुणहीन बच्चों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है।