दयाकर करुणामय दातार, तेरे दरस का प्यासा हूँ प्रभु

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दयाकर करुणामय दातार, तेरे दरस का प्यासा हूँ प्रभु

दयाकर करुणामय दातार
तेरे दरस का प्यासा हूँ प्रभु
सुन ले मेरी पुकार
दयाकर करुणामय दातार

मात, पिता, बन्धु, बान्धव की
सुनी-अनसुनी कर दूँ बातें
तेरी वाणी सुनने को मन
तरसे बारम्बार
दयाकर करुणामय दातार

प्रबल तरङ्गे स्वरमय उपजें
सावधान कानों को कर दें
ऐसे सौभाग्यों को तू ही
कर देता साकार
दयाकर करुणामय दातार

वर्त्तमान या सञ्चित कर्म हों
तुझसे छिपा ना, सब कुछ जाने
सुनूँ सर्वदा तेरी वाणी
जो जीवन-आधार
दयाकर करुणामय दातार

तेरी सात्विक वाणी का प्रभु
तिरस्कार ना करूँ जीवन में
प्यार, विचार, आचार, व्यवहार हो
तदनुसार प्रचार
दयाकर करुणामय दातार

प्रलय तू चाहे पल में कर दे
सृष्टि चाहे पल में घड़ दे
तेरे गुण गिन सके ना कोई
तेरी महिमा अपार
दयाकर करुणामय दातार

दयाकर करुणामय दातार
तेरे दरस का प्यासा हूँ प्रभु
सुन ले मेरी पुकार
दयाकर करुणामय दातार
दयाकर करुणामय दातार