नित विषयों की सोच कर तू, यह पीऊँ यह खाऊँ
नित विषयों की सोच कर तू
यह पीऊँ यह खाऊँ
ये झाँकूँ ये तान सुनूँ मैं
तन को गन्ध लिपटाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
कभी न सोचा मूरख तूने
काम किसी के आऊँ
इन हाथों से किसी दुखी का
कुछ तो दर्द मिटाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
ले कृपाण रण साज सँवारूँ
कुछ जौहर दिखलाऊँ
और नहीं तो आँख तक ही
पोछ किसी की जाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
ढ़ोर मरे – सोचे बन जूता
जग के पैर बचाऊँ
टुक विचार अपनी चमड़ी पर
मैं क्यूँ कर इतराऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
जीते जी कर ले कुछ करनी
बार ही बार मनाऊँ
कहीं न रोवे अब बीते दिन
कैसे फेर बुलाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
बिन माँगे सब रस पावे
वो तुझको राह बताऊँ
नाम भजन वो कल्प-वृक्ष है
जिससे सब फल पाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
सुन मन हित की बात सुनाऊँ
स्वर :- सुश्री वन्दना जी वाजपेयी










