रस से आर्द्र करने वाले सोम प्रभु हे मेरे चाँद

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रस से आर्द्र करने वाले सोम प्रभु हे मेरे चाँद

रस से आर्द्र करने वाले
सोम प्रभु हे मेरे चाँद
भक्ति रस का पान करा दे
हो जाए हृदय पूर्ण शान्त
रस से आर्द्र करने वाले

जैसे के याज्ञिक कोई मानव
सोमरस का करता है पान
मन बुद्धि के सिलवट्ंटो का
ध्यान रूप पेषण का रसान
ऐसा रस जो हमको मिले
प्रेम से होवे हृदय खिलान
भव्य भक्ति-तर्पित तृप्ति
हमको कर देना प्रदान
रस से आर्द्र करने वाले

पान किए हुए हृदय हमारे
शान्तिदायक करो भगवन्
हम सब के दुःख दर्दों को हरो
हृदय का करो शमन
उत्कृष्ट सुखदाता बनो
पिता-पुत्र के प्रेम समान
तुम हो जन्मद पालक पोषक
सुख का दे दो उपदान
रस से आर्द्र करने वाले

प्रधी प्रभूत कीर्तिवाले
हमको दे दो धी: का दान
दो उपदेश के बुद्धि द्वारा
कर्तव्यों का होवे भान
बिन बुद्धि ज्ञान के कैसे करें
कर्तव्यों का ध्यान
तुम ही हमारे मित्र बनकर
उद्बोधित करो सत्य ज्ञान
रस से आर्द्र करने वाले

हे बुद्धिप्रद परमात्मन्
सोम औषधि के समान
आयु वृद्धि करो हमारी
करो निरोगी आयुष्यमान्
आत्मा इन्द्रियाँ होवें सबल
रहे उन्नत मनोबल महान्
शक्ति स्फूर्ति होवे समन्वित
धर्मानुकूल करें अनुष्ठान्
रस से आर्द्र करने वाले

रस से आर्द्र करने वाले
सोम प्रभु हे मेरे चाँद
भक्ति रस का पान करा दे
हो जाए हृदय पूर्ण शान्त
रस से आर्द्र करने वाले