जीने को तो तू जी रहा विषयों में मन लगाए क्यूँ

0
11

जीने को तो तू जी रहा विषयों में मन लगाए क्यूँ

तर्ज : दिल ही तो है तड़प गया

जीने को तो तू जी रहा विषयों में मन लगाए क्यूँ

मन तो तेरा भटक रहा मन को तू व्यर्थ सताए क्यूँ ? ॥ जीने को तो…

मुख से कहे कड़े वचन, बदले में ना हुए सहन

हमदर्द ना कभी हुआ, मन में दया न आए क्यूँ ॥ जीने को तो…

पापों से मन हटा नहीं, सत्कर्म में लगा नहीं

काँटों की राह पे ज़िन्दगी चोट पे चोट खाए क्यूँ ॥ जीने को तो…

आबाद खुद भी न हुआ, बरबाद औरों को किया

दुखियों को तू सताए क्यूँ लेता रहा तू हाय क्यूँ ॥ जीने को तो…

धर्म पे ना तेरा चलन ऋषियों का ना सुना कथन

बन्दे ये तेरी भूल है धरम से निजात पाए क्यूँ ॥ जीने को तो…

मन से हटा मद मोह को लोभ काम क्रोध को

बाकी जन्म सँवार के प्रभु की शरण न आए क्यूँ ॥ जीने को तो…

(निजात) = छुटकारा