योगी आया वो वेदों वाला, किया उजियाला

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योगी आया वो वेदों वाला, किया उजियाला

योगी आया वो वेदों वाला,
किया उजियाला,
दुनिया में सच्चे ज्ञान का वो
तो देवता सारे ही जहान का।।

आदि में थी दया जिसके अंत में आनंद था,
नाम भी कितना प्यारा था,
स्वयं पिया जहर हमको अमृत पिला गया,
कभी न हिम्मत हारा था।।

आड़ में धर्म की यहां दीन
दुःखियों पर जुल्म गुजारे जाते थे,
अनेकों ही द्रोपदी सावित्री सतियों
के चीर उतारे जाते थे ।।

ईश्वर भक्ति की शक्ति
ही इतनी शक्ति रखती,
जगती सारी ने ऋषि पहचाना,
वो वेद ज्ञान माना जो कारण
था कल्याण का…. वह तो देवता. ।।

आठ बरस की विघवा
रोती रो-रो जीवन खोती,
सोती जाति को आन जगाया
और पूज्य बताया संचार किया
प्राण का….वह तो देवता ….. ।।

प्रेम की बहा कर गंगा मिला
गया वो अपने जिगर के टुकड़ों को,
मुद्दत से गुलाम थी मिटा गया
वो भारत मां के दुःखड़ों को।
देश दीवाना, वो मरदाना,
जल गया बन परवाना लाना
चाहता था वो आजादी,
मर्यादावादी आर्यों से
इंसान का… वह तो देवता …।।

करने को उपकार ऋषि सारे ही
जहान का डट कर चला अकेला था,
चेला था न चेली कोई साथी था न संगी,
ईश्वर एक सहेला था। विष जब खाया,
प्रभु गुण गाया ऋषिवर तब मुस्काया,
आया प्रभु, मैं तेरी शरण में सत्यदेव
भजन में मजा है स्वर तान का …।।