नमस्ते,
योगदर्शन प्रायोगिक प्रशिक्षण शिविर
(दिनांक: ०१ मार्च – ०९ मार्च २०२५)
(क) शिविर की विशेषताएँ
- पूर्ण गहन मौन
- योगदर्शन के प्रथम पाद का प्रायोगिक प्रशिक्षण
- विषय चिंतन, मनन से निर्णय, साक्षात्कार विधि का प्रशिक्षण
- विवेक संपत्ति का वर्धन
- ज्ञान संरक्षण के स्थायित्व का उपाय-बोध
- चित्त की एकाग्रता
- लघु, सात्विक और पुष्टिकारक भोजन
(ख) प्रवेशार्थी योग्यता
- अनुशासन प्रियता
- पूर्ण मौनानुकूल व्यवहार
- साधना प्रियता
- शारीरिक स्थिरता एवं किसी विशेष रोग का न होना
- योगदर्शन का विशेष स्वाध्याय
(ग) शिविर की आवश्यकताएँ
- साधारण परिधान
- बाह्य सम्पर्क न रखना
- कक्षाओं में समय पर (समय से पाँच मिनट पूर्व) पहुँचना
शिविरार्थी संख्या: मात्र 6
शिविर व्यवस्था शुल्क: स्वैच्छिक
विशेष: यह शिविर केवल पुरुषों के लिए है।
शिविर निर्देशक व प्रशिक्षक
- स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक
- शिविर निरीक्षक व प्रशिक्षक – स्वामी वेदपति जी

शिविर दिनचर्या
प्रातः
- ०४:०० – जागरण व मन्त्र पाठ
- ०४:१५ – ०५:२५ – शौच, व्यायाम, स्नानादि
- ०५:३० – ०६:३० – उपासना प्रशिक्षण
- ०७:०० – ०८:०० – यज्ञ व वेद प्रवचन
- ०८:१५ – प्रातराश
- ०९:१५ – १०:१५ – योगदर्शन अध्ययन (प्रथम-पाद)
- १०:३० – ११:३० – योगदर्शन प्रायोगिक प्रशिक्षण
मध्याह्नोत्तर
- ११:३० – २:२५ – भोजन, विश्राम व चिन्तन
- २:३० – ३:३० – चित्त परिकर्म व निदिध्यासन
- ३:३० – ४:३० – श्रमदान
- ४:३० – ५:३० – शौच, व्यायाम आदि
सायं
- ५:३० – ६:३० – व्यक्तिगत उपासना
- ६:४० – ८:१५ – भोजन, दुग्धपान आदि
- ८:२० – ८:३० – श्लोक-भ्रमण
- ८:३० – ९:१५ – आत्मनिरीक्षण, रात्रि मन्त्र-पाठ
(आवश्यकता व विशेष परिस्थितियों में दिनचर्या में परिवर्तन सम्भव है।)
शिविर स्थल एवं संपर्क विवरण
- आयोजक: दर्शन योग महाविद्यालय, आर्य वन, रोजड (गुजरात)
- स्थान: श्रीमद् दयानन्द कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, चोटीपुरा, पो.-रजबपुर, ज्योतिबाफुले नगर, अमरोहा, उत्तर-प्रदेश – 244236
- प्रवेश स्वीकृति: केवल दूरभाष के माध्यम से
- सम्पर्क सूत्र: 9558889600 (सम्पर्क समय: मध्याह्न १२:०० से १:००)

शिविरार्थियों के लिए पालनीय आवश्यक निर्देश
(शिविर से पूर्व तक अपने निवास में ही रहते हुए)
- प्रतिदिन दोनों संध्या-समय में एक-एक घंटे ध्यान में समय लगाएँ अथवा न्यूनतम प्रातःकाल एक घंटा एवं सायंकाल आधा घंटा ध्यान करें।
- योगदर्शन के प्रथम पाद के 40 सूत्रों तक भाष्यसहित, प्रतिदिन कम से कम 1-2 सूत्रों का पाठ करें।
- सामान्य दिनचर्या में कम से कम एक घंटा मौन रहें और पढ़े हुए विषय का चिंतन-मनन करें।
- इन नियमों के पालन की लिखित स्वीकृति प्रदान करें।
- सप्ताह के प्रत्येक रविवार को नियमों के पालन की स्थिति की सूचना समूह में सन्देश के माध्यम से प्रेषित करें।










