ये उम्र बची है जो बाकी
तर्ज – ये रात है प्यासी-प्यासी…….
ये उम्र बची है जो बाकी,
कहीं यूँ ना गुज़र जाये।
कर्म कोई कमाँ लेना ऐसा,
जीवन ये संवर जाये।।
सुबह शाम तू भी ‘सचिन’
उस प्रभु के, चरणों में ध्यान किया
कर सहारा है वो ही तेरा इस जहाँ में,
उसी के सहारे जिया कर
विजय गीत गाओ,
उसे ना भुलाओ,
भव सागर तर जाये ये उम्र बची है………
तेरी ज़िन्दगानी सुहाना सफर है,
मंज़िल इसे तू दिखा दे रस्ता कहाँ है
कहाँ पे है जाना, चलना इसे तू सिखा दे
भंवर में है नैया, प्रभु ही खिवैया,
उसी पे नज़र जाये ये उम्र बची है……
धनवान हो कोई या हो भिखारी,
ज़माने से जाना पड़ेगा किया
गर्भ में था जो वादा कभी,
वो वादा निभाना पड़ेगा
ये जीवन की ज्योति,
ये अनमोल मोती,
ऐसे ना बिखर जाये ये उम्र बची है…….










