ये फूल और कलियाँ, झरनें झील नदियाँ
तर्ज- ये रेशमी जुल्फेंकें…….
ये फूल और कलियाँ,
झरनें झील नदियाँ
प्रभु को नमन,
कर रहे है सभी प्रभु को……
तेरे दिल में ही वो दाता,
आये नज़र क्यूँ फिरता अरे तू,
इधर-उधर कहता है वो सचिन ‘सारंग’,
ना करना ध्यान
तू अपना भंग प्रभु को नमन…….
पी-पी बोले पपीहा,
बागों में गाये अनमोल नगमें,
रागों में मैना के दिल को भाये,
कोयल भी बार बार गाये
प्रभु को नमन……
तूफाँ आँधी और ये,
घन वृष्टि प्यारी रचना उसी की है,
ये सृष्टि भंवरों की गुँजार मधुर,
झिंगुर भी करते हैं
घुर-घुर प्रभु को नमन……
सारे संसार का है,
वो वाली कोई शय उसके बिन ना,
है खाली पतझड़ में हैं बहारों में,
है गुल गुलशन व ख़ारों में
प्रभु को नमन……….










