यह ओ३म् का झण्डा आता है,ऐ सोने वालो ! जाग चलो।।

0
52

यह ओ३म् का झण्डा आता है,
ऐ सोने वालो ! जाग चलो।।

लेकर उगते रवि की लाली,
ले नित्य बसन्ती हरियाली।
यह ले-ले लहरें आता है,
धरती के जागे भाग चलो।।१।।

जब गोली गोले बरसेंगे,
और सिर कट-कट कर सरसेंगे।
हम मौत के भीषण आँगन में,
हँस-हँस खेलेंगे फाग चलो।।२।।

पर्वत से कह दो नम जाए,
सागर से कह दो थम जाए।
यह एक बनाने दुनिया को,
उमड़ा है अनुराग चलो।।३।।

अब प्रेम सच्चाई विद्या का
यह झण्डा लहराया बाँका।
हिंसा पाखण्ड अविद्या से,
कह दो कि अब तुम भाग चलो।।४।।