यह दूषित समाज बदल डालो। (धुन-आज मेरे यार की शादी है)
यह दूषित समाज बदल डालो।
समाज बदल डालो,
यह गन्दे रिवाज बदल डालो।
प्रतीक्षा का समय नहीं है
आज बदल डालो।
एक डाक्टर की दवाई कई
वर्षों तक खाई।।
न उन्नीस बीस मर्ज में
फर्क कुछ दिया दिखाई ।।
हजारो दिये इन्जेक्शन हुआ
उल्टा ही रिऐक्शन ।।
फिर भी डाक्टर नहीं बदला
पड़ा खतेरे में जीवन।
अयोग डाक्टर नकली
दवा यह इलाज बदल डालो।।1।।
जो आठों पहर कमाये
सब से छोटा कहलाये।
नेक मेहनतकश व्यक्ति,
कभी भर पेट न खाये,
कोई कहे कर्महीन है,
कोई कहे मन मलीन है,
किसी को ना हमदर्दी,
बेचारा पराधीन है।
सदियों पुराना गला सड़ा
यह मिजाज बदल डालो।।2।।
जो तिनका भी न उठाये,
उमर भर मौज उड़ाये,
निकम्मा और निठला,
यहाँ पर पूजा जाये।
जो सब रोगों का रोग है,
उसे कहें बड़ा लोग है,
समाज और देश का दुश्मन,
मार देने के योग्य है।
इन्सानियत का धन से गलत,
अन्दाज बदल डालो।।3।।
एक हो सबकी शिक्षा,
एक सी ही हो दीक्षा।
एक हो जीवन स्तर,
एक सी ही हो परीक्षा ।
ऐसी शिक्षा की होड़ में,
जो जैसा आये दौड़ मे,
योग्यता पर दें नम्बर,
हो न्यायोचित जोड़ में।
तथा कथित पद जन्म जात,
नाजायज बदल डालो।।4।।
धार्मिक, तपस्वी, त्यागी,
सबल आदर्श अनुरागी।
राज के संचालन की,
व्यवस्था में हो भागी।
यह सम्भव है तब ही,
पहले हम सुधरें सब ही,
बुराई से बचने की,
करो प्रतिज्ञा अब ही।।
जो जनता का प्रेमी नहीं
वह राज बदल डालो।।5।।
वचन
द्वार द्वार लाली के चर्चे
आया नया सवेरा है
महलो में आलौक मगर
कुटिया में तम का डेरा है
दो शब्दो में इस विकास का
सार कहे देता हूँ मैं गांव में
रोशनी नहीं तो सारा देश अंधेरा है










