वैदिक विद्या केन्द्र
डी.ए.वी. ग्रुप, चेन्नई
व्यक्तित्व विकास शिविर
(Personality Development Camp)
📅 20 जनवरी 2026 (मंगलवार) से 26 जनवरी 2026 (सोमवार)
📍 स्थान : वैदिक विद्या केन्द्र, पुदुचेरी
शिविर का पावन सान्निध्य
स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक जी
आप दर्शन योग महाविद्यालय आर्यवन रोजड़, गुजरात के निदेशक हैं। स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक ने चार दशकों से वैदिक दर्शनशास्त्रों जैसे योगदर्शन, सांख्यदर्शन, न्यायदर्शन, वेदान्तदर्शन आदि का अध्ययन एवं अध्यापन किया है व श्रोताओ के मन में दर्शनशास्त्र एवं ईश्वर के प्रति विशेष रूचि को भी उजागर किया है। आपने अपनी अनवरत यात्राओं से हजारों लोगों को वैदिक ज्ञान द्वारा लाभान्वित कर समाज को एक विशेष गति प्रदान की है।
आचार्य सोनेराव जी
आप वैदिक विद्या केंद्र के आचार्य हैं। आप विश्व के अनेक देशों में दो दशकों से भी अधिक समय प्रचारार्थ रह चुके हैं। आपकी संस्कृत और वैदिक सिधान्तों पर अच्छी पकड़ है। आप वैदिक विद्या केंद्र में महर्षि दयानंद के ग्रंथों एवं गीता पर हिंदी एवं अंग्रेजी में नियमित कक्षाएं लेते हैं।
श्रीमति व्रतिका जी
आपने दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात में एक वर्ष के दीर्घकालीन शिविर में भाग लेकर योग साधना की है। आप सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की संचालिका हैं। आप वैदिक विद्या केंद्र की संचालिका भी हैं। आप केंद्र में आयोजित शिविरों का संचालन करती है।
व्यक्तित्व विकास शिविर – निमंत्रणम्
इस शिविर में वैदिक दर्शनों के आधार पर व्यक्तित्व विकास की परिभाषा, उपाय, बाधकों का निवारण किया जाएगा। शिविर का आधार अष्टांग योग, यानी योग का वास्तविक स्वरुप होगा. योग, जैसे की सामान्य रूप से प्रचलित है, मात्र आसन एवं प्राणायाम नहीं है। योग मनुष्य को अपने मन पर नियंत्रण करते हुए मानवीय विकास के उच्चतम शिखर पर पहुँचने का मार्ग दिखाता है. यह शिविर उसी योग पर आधारित होगा।
शिविर में आर्य समाज, जो कि भारतीय उत्थान की लिए बनी पहली (१८७५ में स्थापित) सबसे पुरानी संस्था है, के नियमों पर भी चर्चा होगी. इसका उद्देश्य होगा कि जो इसके सदस्य नहीं है, वे विचार करके इसके सदस्य बने. जो इसके सदस्य हैं, वे इसके नियमों को अपने जीवन में और अधिक तन्मयता से उतारे।
इस व्यक्तित्व विकास शिविर में सभी शिविरार्थियों के लिए पूर्ण मौन एवं अनुशासन का पालन अनिवार्य रहेगा।

वैदिक विद्या केंद्र का परिचय
आर्य समाज चेन्नई पिछले 100 वर्षों से प्राचीन शास्त्रों, धार्मिक, सांस्कृतिक, शिक्षा, संस्कार एवं समाज सेवा आदि क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। यह 30 से अधिक DAV विद्यालयों को संचालित करता है, जिनमें 45000 छात्र अध्ययन करते हैं। आर्य समाज चेन्नई ने भारतीय ज्ञानाश्रित नैतिक मूल्यों से युक्त व्यक्ति निर्माण के कार्यों को व्यवस्थित और विस्तारित करने हेतु “वैदिक विद्या केन्द्र, पुदुचेरी” की स्थापना की है। इसमें गुरुकुल, साधक आश्रम, डिजिटल प्रचार केंद्र, विभिन्न आयु वर्गों के लिए शिविर स्थल, आवासीय व अध्ययन व्यवस्था है।
वीवीके में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए पंजीकरण
- पंजीकरण और सत्रों में भाग लेना सभी के लिए निःशुल्क है। आपसे अनुरोध है कि संलग्न QR कोड को scan करके पंजीकरण करें।
- प्रतिभागी अपनी इच्छा से वैदिक विद्या केंद्र और इस आयोजन के साझा उद्देश्य के लिए उदारतापूर्वक योगदान दे सकते हैं।
- प्रतिभागियों से अपेक्षा है कि वे अपने प्रवास के दौरान वैदिक विद्या केंद्र के नियमों का पालन करें और मर्यादा बनाए रखें।
- जो प्रतिभागी वीवीके परिसर में रहना चाहते हैं, वे आवास एवं भोजन के लिए न्यूनतम शुल्क (जो पंजीकरण के पृष्ट पर दिया गया है) का भुगतान करें। अगर कोई यह शुल्क देने में असक्षम है तो हमें ईमेल करें। आपको यथा योग्य छूट दी जा सकती है।
स्थान
वैदिक विद्या केंद्र परिसर
आर.एस. नंबर-28, माधुर रोड,
गणपतिचेट्टिकुलम,
पीआईएमएस अस्पताल के पीछे,
कलापेट, पुडुचेरी – 605014
वीवीके का मानचित्र लिंक:
संपर्क सूत्र
📱 91764 10164
📱 93848 12741
📱 74187 27133
🕉️ शिविर के कार्यक्रम की दैनिक अनुसूची 🕉️
| समय | कार्यक्रम |
|---|---|
| प्रातः 04:00 बजे | जागरण – प्रार्थना, निवृत्ति |
| 05:00 – 06:15 बजे | आसन, प्राणायाम, ध्यान |
| 06:15 – 07:00 बजे | स्नान, संध्योपासना |
| 07:00 – 08:15 बजे | यज्ञ, वेद-पाठ, वेद-स्वाध्याय एवं प्रवचन |
| 08:15 – 09:00 बजे | प्रातः नाश्ता |
| 09:00 – 09:30 बजे | स्वाध्याय एवं कक्षा की तैयारी |
| 09:30 – 10:30 बजे | प्रथम कक्षा: अष्टांग योग द्वारा व्यक्तित्व विकास – स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक |
| 10:30 – 11:00 बजे | निधिध्यासन (चिंतन) |
| 11:15 – 12:15 बजे | द्वितीय कक्षा: आर्य समाज के नियम एवं प्रासंगिकता – आचार्य सोनेराव जी |
| 12:30 – 02:30 बजे | भोजन एवं विश्राम |
| 02:30 – 03:30 बजे | स्वाध्याय एवं कक्षा की तैयारी |
| 03:30 – 04:30 बजे | तृतीय कक्षा: अष्टांग योग द्वारा व्यक्तित्व विकास – स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक |
| 04:30 – 05:15 बजे | श्रमदान |
| 05:15 – 05:30 बजे | अल्पाहार |
| 05:30 – 06:10 बजे | भ्रमण / स्नान |
| 06:20 – 07:00 बजे | सन्ध्योपासना – श्रीमती व्रतिका आर्य जी |
| 07:00 – 08:00 बजे | भोजन एवं श्लोक गायन |
| 08:00 – 08:45 बजे | आत्मनिरीक्षण – स्वामी विवेकानन्द जी |
| 08:45 बजे पश्चात | दुग्धपान एवं शयन |
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