वीरांगना सावित्री जी

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सन् 1932 का समय था। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में सावित्री जी नामक एक वीर आर्य नारी ने सत्याग्रह में भाग लिया और गिरफ़्तारी के बाद उन्हें फतेहपुर (उ.प्र.) की जेल में बंद कर दिया गया। नित्य हवन करने वाली सावित्री जी ने कहा कि–वे हवन किए बिना भोजन ग्रहण नहीं करेंगी।

जेल प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलने पर उन्होंने निर्भीक होकर अनशन आरंभ कर दिया। कठोर परिस्थितियों और शारीरिक कष्टों के बावजूद उनका संकल्प अडिग रहा। इस विषय पर आर्य समाज में व्यापक प्रतिक्रिया हुई। वरिष्ठ नेता महात्मा नारायण स्वामी ने United Provinces (वर्तमान उत्तर प्रदेश)के गवर्नर को तार भेजा । सरकार को झुकना पड़ा और सावित्री जी को कारागार में हवन करने की अनुमति देनी पड़ी।धन्य हैं वे आर्य नारी जिनके साहस के आगे अंग्रेजों को झुकना पड़ा।

स्त्रोत–भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज का योगदान लेखक– आचार्य सत्यप्रिय शास्त्री