“विद्या जिसके पास नहीं,और करता कोई गुणगान नहीं”

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(१)🪴💐🌹🙏
विद्या जिसके पास नहीं,
और करता कोई गुणगान नहीं।
ब्राह्मण की ना रक्षा करता,
दीनों को,दे दान नहीं।
इष्ट मित्र और निजी जनों में,
पाता जो सम्मान नहीं।
ऐसे जन का राज काज में,
होता कहीं स्थान नहीं।
(२)🌺🪴💐🌹
आज्ञा का जो पालन करता,
वो ही पुत्र कहाता है।
पति की सेवा ठावे निशदिन,
तब त्रिया का नाता है।
विपत्ति में साथ निभावे,
वो ही सच्चा भ्राता है।
“धर्मी”वो ही धर्मी है,
जो कष्ट धर्म हित ठाता है।
(३)🪴💐🌹🌸
लड़के के जब लड़का हो जा,
घर में रहना ना चाहिए।सुंदर-सुंदर वस्त्र त्याग दे,
तन पर गहना ना चाहिए।
खानपान के लिए किसी के,
घर पर कहना ना चाहिए।
सबको “धर्मी” सम समझे,
फिर भाई बहना ना चाहिए।

(४)💐🌹🙏🌺
पच्चीस वर्ष तक ब्रह्मचर्य का,
व्रत पालन करना चाहिए।
विद्या पढ विद्वान बने,
तब ग्रहस्थ में पग धरणा चाहिए।
वानप्रस्थ ले वन में जावे,
घर पर ना मरना चाहिए।
सन्यासी बन देश में विचारे,
अंधकार हरना चाहिए।