वेदों के अनुकूल रहा जब तक प्रोग्राम हमारा

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वेदों के अनुकूल रहा जब तक प्रोग्राम हमारा

वेदों के अनुकूल रहा
जब तक प्रोग्राम हमारा
सर्व शिरोमणि विश्व गुरु
तब तक रहा नाम हमारा।।
महाभारत के बाद में
हम वेदों को भूल गये हैं


ऋषियों की फुलवारी के
मुरझा सब फूल गये हैं
काम, क्रोध, मध, लोभ,
मोह के अन्दर टूल गये हैं
परोपकार को छोड़ स्वार्थ के
अन्दर झूल गये हैं


सत्य असत्य विचार के संग,
जब तक रहा काम हमारा
सर्वशिरोमणि विश्व गुरु
तब तक रहा नाम हमारा।।1।।

वेदों के प्रतिकूल चले से
चरित्र हीनता आई
ऋषियों के सत्यज्ञान
बिना पहचान दीनता आई
खानपान शुद्ध साफ हवा
बिन मन मलीनता आई


पश्चिमी सभ्यता अभक्ष
पदार्थ सेवन से क्षीणता आई
नित्य कर्म से प्रेम रहा
जब तक सुबह शाम हमारा
सर्वशिरोमणि विश्व गुरु
तब तक रहा नाम हमारा।।2।।

अष्टावक्र मुनि एक रोज
जब जनक सभा में आया
विद्वानों को हंसता देख
मुनिवर ने चमार बताया
उसी ऋषि के बेटे पोतों को
क्या खफ्त समाया


मिस इंडिया का छांट
आज बेशर्मी से करवाया
चरित्र बिना बेकार था
जब तक हड्डी चाम हमारा
सर्वशिरोमणि विश्व गुरु तक
तक रहा नाम हमारा।।3।।

चमक चरित्र की चेहरे पर
नहीं रोगन रोज मलै हैं
लड़के लड़की सड़कों पर
बेढंगी चाल चलें हैं
तन में ताकत का नाम नहीं है


डगमग नाड़ हलै हैं
शोभाराम कहै संभलो
आस्तीनों में सांप पलैं हैं
दिन चर्या पालन का
जब तक रहा इन्तजाम
हमारा सर्वशिरोमणि विश्व गुरु
तब तक रहा नाम हमारा।।4।।