वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
सत्कर्म में ही, रहे मेरा ध्यान
प्राणों में दो शक्ति, प्राणों के प्राण!
पाप-दुरित का करो अवमान
वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
जैसे बछड़ा करता है दुग्ध-पान
गौमाता रखती है बछड़े का ध्यान
ऐसा रखना ध्यान सुबह और शाम
वेदों से पाऊँ नित ज्ञान-विज्ञान
तेरे उपासक का रख लेना ध्यान
सत्कर्म में ही रहे मेरा ध्यान
वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
दो इन्द्रियों में सद्भाव संयम
दु:ख कष्ट में भी रहूँ ना अनमन
लेकर विद्वानों से विद्या का दान
चिन्तन-मनन से बनूँ सत्यकाम
तेरी दया बिन मिले ना परिणाम
सत्कर्म में ही रहे मेरा ध्यान
वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
रहना है हर हाल में ही प्रसन्न
रहूँ मैं निष्कामी कान्ति-सम्पन्न
तेरी स्तुति-भक्ति में है सुखधाम
दे दो अलौकिक शक्ति का वरदान
हे स्तुत्य ! तुझको है शत-शत प्रणाम
सत्कर्म में ही रहे मेरा ध्यान
वरदान दे दो गुणों के भगवान्
वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
वरदान दे दो, गुणों के भगवान्
ओ३म् सं व॒त्स इ॑व मा॒तृभि॒रिन्दु॑र्हिन्वा॒नो अ॑ज्यते ।
दे॒वा॒वीर्मदो॑ म॒तिभि॒: परि॑ष्कृतः ॥
ऋग्वेद 9/105/2
रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई










