“वन में रहकर वेद पढ़े,और प्राणी मात्र से प्यार करे”

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(१)🙏🌹🌺
वन में रहकर वेद पढ़े,
और प्राणी मात्र से प्यार करे।
इंद्रियों का दमन करे और,
विद्या का प्रचार करे।
भूमि ऊपर बिस्तर लावे,
उत्तम ना आहार करे।
“धर्मी”जन जब पास में आवे,
यथायोग्य सत्कार करे।
(२)🌹💐🌷🪴
बालापन में हो सन्यासी,
दुराचार से प्यार करे।
ऋषि मुनि बदनाम करे,
और अपनी मिट्टी ख्वार करे।
बालापन से अपने मन पर,
जो पूरा अधिकार करे।
औरों का कल्याण करे,
और अपना बेड़ा पार करे।
(३)🌹🙏🪴
“धर्मी” हो बैराग जिसे जब,
उसी दिना सन्यासी हो।
ब्रह्मचारी हो गृहस्थी हो
या वन का ही वनवासी हो।
आयु बीस वर्ष होवे या,
पूरी साल पिचासी हो।
राजा हो या रंक कोई हो,
हाकम या चपरासी हो।

(४)🌹🌷🪴💐
सन्यासी को चाहिए ऐसा,
नित ही प्राणायाम करे।
ओ३म् लगाकर ब्याहृति से,
अपना पूरा काम करे।
इन कामों को करते करते,
जीवन खतम तमाम करे।
ऐसा सन्यासी ही निश्चय,
मुक्ति अपना धाम करे।