23 फरवरी (रविवार) से 02 मार्च (रविवार) 2025 तक।
स्थान- आत्मोन्नति (वैदिक योग,ध्यान एवं सिद्धांत प्रशिक्षण केन्द्र),ग्राम-भड़ताना,जिला-जीन्द, हरियाणा- 126113
यह शिविर आचार्य आशीष आर्य जी,दर्शनाचार्य के मार्गदर्शन में सम्पन्न होगा | प्रथम स्तर के कम से कम दो शिविर करने वाले महानुभाव ही ध्यान के द्वितीय स्तर शिविर में प्रवेश ले सकेंगे| वैदिक योग ध्यान को प्रायोगिक स्तर में सीखने के इच्छुक महानुभाव के लिए ये प्रयोग प्रधान शिविर स्वर्णिम अवसर हैं I प्रथम स्तर के शिविर में इच्छुक शिविरार्थी मोबाइल व लैपटॉप का प्रयोग अनुमति पूर्वक 20 मिनट तक कर सकते हैं। द्वितीय स्तरीय शिविर में प्रारंभ में ही मोबाइल जमा करा दिये जाते हैं।
एकांत प्राकृतिक वातावरण में ध्यान की गूढ़ अवस्थाओं को अनुभव करने के अनुकूल वातावरण और मार्गदर्शन शिविर में सहजता से उपलब्ध रहता है। गहन साधना हेतु पृथक्- पृथक् मेडीटेशन सेल्स भी उपलब्ध होंगे |
ये शिविर गंभीरता पूर्ण व ध्यान साधना प्रधान होते हैं। शिविर में निर्देशित प्रयोगो के सतत अभ्यास से ही साधक /साधिका शिविर को स्वयम् के लिये सफ़ल बना सकेंगे | शिविर काल में निर्देशित ध्यान विधि का ही अभ्यास करना अपेक्षित है |
शिविर का आनलाइन प्रसारण नहीं किया जाता है तथा शिविर में किसी प्रकार की आडियो वीडियो रिकार्डिंग्स् की अनुमति नहीं होती है।
कृपया समय देखने व अलार्म लगाने हेतु घड़ी अलग से लायें। पीने के लिए पानी की बोतल, करवस्त्र=रुमाल, पेन, संचिका, करप्रदीपिका= टार्च, टूथब्रश,पेस्ट, साबुन आदि अपनी व्यवहारिक समझपूर्वक स्वयं लायें। अन्य बिस्तर, पात्र ,भोजन आदि केन्द्र में उपलब्ध मिलेंगे।
शिविर में स्थानपंजीकरण (Registration) की प्रक्रिया:-
शिविर में अपना स्थान आरक्षित करने हेतु इच्छुक महानुभाव 23 फरवरी 2025 से प्रारंभ होने वाले शिविर के लिए 20 फरवरी 2025 तक
निम्नलिखित मोबाइल नम्बरों अथवा वाट्स एप पर सम्पर्क कर अपना नाम,आयु व स्थान स्पष्ट सूचना पूर्वक लिखवा लेवें।
शिविर में स्वीकृति प्राप्त व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाता है। स्वीकृति लिए बिना आने पर प्रवेश नही दिया जाता है और उससे उत्पन्न कष्ट के जिम्मेदार वे व्यक्ति स्वयं होंगे।
शिविर में स्त्री-पुरुष के निवास आदि की व्यवस्था पृथक्-पृथक् होती हैं।

सम्पर्क सूत्र:-
- श्री महेंद्र आर्य जी
+917830815937, 8630428884( सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक) - श्री नंद किशोर अरोड़ा जी
+91 93104 44170 (समय – प्रातः10 से सायं 5 तक , रात्रि 8.30 से 10 बजे तक) - श्री आचार्य आत्मप्रकाश आर्य जी
09416773617
(प्रातः 10 बजे से सायं 5 तक, रात्रि 8.30 से 9.30 तक)
शिविर हेतु योगदान कैसे दें?
वैदिक परंपरा के अनुसार निम्नलिखित तीन प्रकार से स्वैच्छिक योगदान दिया जाता है।
(क) शिविर में जिन भौतिक सुविधाओं आवास भोजन आदि को प्राप्त करते हैं, उनके प्रति हम ऋणी न बनें व उन्हें आयोजक आगे आने वाले महानुभावों के लिए भी उपलब्ध कराते रह सकें। इसलिये यथासामर्थ्य अपना स्वैच्छिक योगदान देना अनिवार्य है| स्वैच्छिक योगदान की परम्परा से ही समाज के प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति शिविर का सम्मानपूर्वक लाभ प्राप्त कर सकेगा। इस योगदान की अनिवार्यता गृहत्यागी समाज सेवा में समर्पित विरक्त महानुभाव के लिए नही है।
(ख) शिविर में सीखी समझी गयी सत्य विद्या के संरक्षण व प्रचार -प्रसार हेतु यथासामर्थ्य प्रयास सभी को करना होता है तथा निःशुल्क विद्यादान करने वाले महानुभाव के प्रति भावना पूर्वक यथासामर्थ्य स्वैच्छिक रूप से धनादि को दक्षिणा रूप में समर्पित कर अपनी कृतज्ञता प्रकट करने की वैदिक परंपरा को जीवित रखना भी सभी का कर्तव्य होता है। इससे निःशुल्क विद्यादान करनेवाले ब्राह्मण भी आर्थिक दृष्टि से समाज में स्वाधीन व समर्थ रहकर उचित मार्गदर्शन देते रह सकेंगे।
यह बात विद्यादान करने वालों से अतिरिक्त भिन्न प्रकार से समाजसेवा में समर्पित महानुभावों के प्रति भी यथास्तर समझनी चाहिये।
(ग) इसके अतिरिक्त समाज की उन्नति, अपने उत्तम कर्माशय व चित्त शुद्धि के लिये व्यक्ति को यथासामर्थ्य तन, मन, धन और समय का दान देना चाहिए।
“आत्मोन्नति केन्द्र को सहयोग राशि प्रदान कर 80G रसीद प्राप्त करने के इच्छुक महानुभाव कृपया अपना पैन नंबर अवश्य साथ लायें।”
शिविर स्थल पर कब पहुँचें?
23 फरवरी 2025 रविवार सायंकाल 5.30 बजे तक शिविर स्थल पर पहुँचना अनिवार्य है|
प्रवेश प्रक्रिया 23 फरवरी 2025 को ही पूर्ण हो जायेगी। विलंब से आकर आयोजकों के लिए कृपया बाधा उत्पन्न न करें। विलंब से आने वालों को प्रवेश देने में केन्द्र की प्रतिबद्धता नहीं होगी|










