नमस्ते,
आर्य समाज वैदिक संस्कार केंद्र का भव्य उद्घाटन समारोह
दिनांक: 2 फरवरी 2025 (वसंत पंचमी, रविवार)
स्थान: आर्य समाज, वसुंधरा विहार, बहतराई रोड, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार में आर्य समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। समाज में संस्कृति, संस्कार, सभ्यता एवं समरसता को जीवंत बनाए रखने के इस पावन उद्देश्य से आर्य समाज वैदिक संस्कार केंद्र की स्थापना की गई है। यह केंद्र सामाजिक उत्थान और आध्यात्मिक जागरूकता का केंद्रबिंदु बनेगा, जहां बिना किसी भेदभाव के सभी को वैदिक संस्कारों से संस्कारित किया जाएगा।
इस शुभ अवसर पर 2 फरवरी 2025, वसंत पंचमी के दिन एक भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी धर्मप्रेमी जनों को सपरिवार आमंत्रित किया गया है।

कार्यक्रम विवरण:
- सुबह 10:00 से 11:30 बजे – वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ वैदिक हवन
- 11:30 से 2:00 बजे – भजन संध्या और वैदिक प्रवचन
- मुख्य यजमानों की उपस्थिति – क्षेत्र के गणमान्य अतिथियों का सान्निध्य
- भोजन व्यवस्था – कार्यक्रम के समापन के बाद सभी के लिए भंडारे की व्यवस्था
मुख्य वक्ता एवं यज्ञ ब्रह्मा:
- आचार्य संजीव आर्य (केंद्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय आर्य संरक्षिणी सभा)
- पं. जयदेव शास्त्री (धर्माचार्य, आर्य समाज बहतराई रोड, बिलासपुर)
- ब्रह्मचारी पंकज आर्य (सस्वर वेद पाठक, गुरुकुल टटेसर, दिल्ली)

विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य यजमान:
- माननीय सुशांत शुक्ला जी – विधायक, बेलतरा
- माननीय ओमप्रकाश पांडेय जी – पार्षद, वार्ड क्रमांक 57, बिलासपुर
- हरिहर प्रसाद लाल श्रीवास्तव जी – अध्यक्ष, वसुंधरा विहार कॉलोनी
- डॉ. धर्मेंद्र दास जी – अध्यक्ष, पाटलीपुत्र संस्कृति विकास मंच
आर्य समाज की भूमिका एवं उद्देश्य:
आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य वेदों के सत्य ज्ञान का प्रचार करना है। समाज में व्याप्त अज्ञान, अंधविश्वास एवं भेदभाव को समाप्त कर सभी को समानता, शिक्षा और आध्यात्मिकता का संदेश देना ही आर्य समाज का ध्येय रहा है। इस वैदिक संस्कार केंद्र की स्थापना से समाज में धार्मिक चेतना जागृत होगी और संस्कारों की नई अलख जगेगी।

समारोह में सहभागिता का अनुरोध:
सभी श्रद्धालुजन इस पावन अवसर पर सपरिवार आमंत्रित हैं। कृपया समय का विशेष ध्यान रखें और वैदिक यज्ञ, भजन एवं प्रवचनों का लाभ उठाएं।
निवेदक:
आर्य समाज परिवार, बहतराई रोड, बिलासपुर
यह आयोजन केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि समाज के पुनर्निर्माण और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आइए, हम सब मिलकर इस पावन कार्य में सहभागी बनें और वैदिक संस्कृति को पुनः प्रतिष्ठित करें।










