वैदिक संस्कृति का पुनर्जागरण गांजर:

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🌸 वैदिक धर्म का दिव्य उत्सव – आर्य समाज गांजर में गूंजे वेद मंत्र 🌸

📅 पावन तिथियाँ: 8, 9, 10 फरवरी 2025
🎉 महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर भव्य आयोजन

💫 जब वेद की दिव्य ध्वनि गूंजती है, जब हवन कुंड से पवित्र आहुतियों की सुगंध फैलती है, जब भजनों की मधुर स्वर लहरियां आत्मा को शुद्ध करती हैं, तब निश्चित ही धर्म और संस्कृति का पुनर्जागरण होता है।

🏵️ इसी पावन उद्देश्य से महाविद्यालय गुरुकुल आश्रम आमसेना (ओडिशा) के 58वें वार्षिकोत्सव एवं आर्य समाज गांजर (छत्तीसगढ़) के वार्षिक महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।

🌿 महायज्ञ एवं वैदिक अनुष्ठान 🌿


इस महासंगम में महायज्ञ का दिव्य आयोजन किया गया, जिसे आचार्य विश्वामित्रार्य जी के ब्रह्मत्व में सम्पन्न किया गया। यज्ञ की लहरियों ने संपूर्ण वातावरण को शुद्ध एवं पावन बना दिया।

🎶 भजन और प्रवचन की आध्यात्मिक गंगा 🎶


उत्तर प्रदेश, बिजनौर से पधारे पं. नरेश दत्त जी ने अपनी मधुर वाणी में भजनों एवं प्रवचनों के माध्यम से सभी को वैदिक ज्ञान, ईश्वर भक्ति एवं सच्चे धर्म का संदेश दिया। उनके अमृतमयी शब्दों ने जनमानस को भक्ति और संस्कारों की धारा में बहा दिया।

🧘‍♂️ योग एवं नैतिक शिक्षा – बालकों में संस्कारों का सिंचन 🧘‍♀️


📍 स्थान: शासकीय हाई स्कूल, गांजर
समय: प्रातः 11:00 बजे

संस्कारों की नींव बचपन में रखी जाती है। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों के लिए योग एवं नैतिक शिक्षा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने योगासन, प्राणायाम एवं सदाचार के गूढ़ रहस्यों को जाना और जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

🙏 श्रद्धालुओं का उत्साह और समर्पण 🙏


इस पावन अवसर पर आर्य समाज गांजर के प्रधान श्रीमान अशोक जी चंद्राकर, ओमप्रकाश जी आर्य सहित गांजर ग्राम के सैकड़ों श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति भाव से उपस्थित रहे। उनका समर्पण इस बात का प्रमाण था कि धर्म की लौ कभी मंद नहीं होती, वह युगों-युगों तक जलती रहती है।

एक संदेश – जो हृदय को छू जाए


यह उत्सव केवल एक आयोजन नहीं था, यह संस्कृति का संरक्षण, वेदों की पुनर्स्थापना, सत्य की साधना और आत्मा का परमात्मा से मिलन था।
जिस समाज में वेदों की ध्वनि गूंजती है, वहां अज्ञानता, अंधविश्वास और पाखंड का स्थान नहीं होता।

💖 धन्य वे पावन क्षण, धन्य वे पुण्यात्मा जो इस आयोजन में सम्मिलित हुए। 💖


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