वैदिक मन्त्र स्वर प्रशिक्षण कार्यशाला

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आर्ष न्यास के तत्त्वावधान में
वैदिक मन्त्र स्वर प्रशिक्षण कार्यशाला
11 से 18 अगस्त 2024
सान्निध्य – प्रो. नरेश कुमार धीमान चेयरपर्सन, महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी), महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर (राज.)
स्थान – वानप्रस्थ साधक आश्रम
आर्यवन, रोजड़, त.-तलोद, साबरकांठा, गुजरात-383307
दूरभाष – 9427059550, 8290896378
आवेदन लिंकhttps://forms.gle/r7EcZW2TUivWTTT26

वैदिक धर्मी के लिए वेद पाठ व स्वाध्याय नित्य प्रति का कार्य है। वेद का पाठ व स्वाध्याय हमें सीधे ईश्वर से जोड़ता है। वेद पाठ व स्वाध्याय करते समय वेदमन्त्रों पर लगी अनेक खड़ी-पड़ी रेखाएँ व चिह्न भी दिखाई देते हैं। ये स्वर चिह्न होते हैं, जिनके अनुसार वेद मन्त्रों के उच्चारण व अर्थ में भेद होता है। जिन्हें संस्कृत व्याकरण पढ़ने से इन स्वर चिह्नों का कुछ ज्ञान होता है, वे भी प्रायः उन्हें मन्त्रों पर ठीक से समझ नहीं पाते हैं। इन सब के ज्ञान व समझ को वेद प्रेमियों में पहुँचाने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। वेद को अधिक अच्छे से समझना व उससे अधिक परिचित होना सुखद शान्ति देने वाला है। वेद से ठीक परिचित होकर हम उसकी रक्षा भी अधिक अच्छे से कर सकते हैं। वेद से अधिक लाभान्वित हो सकते हैं।

स्नातकोत्तर परीक्षाओं में वेद विषय के पाठ्यक्रम में वैदिक स्वर विधि संहिता पाठ से पदपाठ या पदपाठ से संहिता -पाठ में मन्त्र का स्वर सहित परिवर्तन करना विद्यार्थियों को बड़ा कठिन प्रतीत होता है। स्वतन्त्र रूप से वेद का स्वाध्याय करने वाले लोग भी इस विषय में कठिनाई का अनुभव करते हैं। इसी कठिनाई के निदान हेतु यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। जिसमें सरलतम विधि से पाणिनीय अष्टाध्यायी तथा प्रातिशाख्य ग्रन्थों के आधार पर वैदिक स्वर विधि का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह कार्यशाला अपने ढंग की अनूठी कार्यशाला होगी और इस विषय में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी।
ऐसी कार्यशाला गत वर्ष भी ऋषि उद्यान में हुई थी, जो कि बहुत सफल रही। यह कार्यशाला महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी) के चेयर प्रोफेसर डॉ. नरेश कुमार धीमान के निर्देशन व प्रशिक्षण में होगी। जो वैदिक स्वरविधि पर अनेक वर्षों से निष्ठा पूर्वक कार्य कर रहे हैं।
शिविर शुल्क – ₹2000/-
सामूहिक निवास निःशुल्क। पृथक् एकाकी, दो या चार व्यक्ति वाले कक्ष सशुल्क होंगे, जिनमें पंखा या वातानुकूलन के अनुसार शुल्क होगा।

अपेक्षित योग्यता – वैदिक प्रशिक्षण के इच्छुक महानुभव से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संस्कृत के सन्धि, सन्धि-विच्छेद तथा समास के सामान्य नियमों से अच्छी तरह अवगत हों।
प्रत्येक प्रतिभागी को नियमित रूप से स्वर विषयक अभ्यास के लिए अभ्यास पुस्तिका (कॉपी), पेन, लाल और काली पेंसिल, शार्पनर और रबर अपने साथ लाना है। सभी प्रतिभागी प्रतिदिन अभ्यास के लिए इन्हें अपने साथ कार्यशाला में अवश्य लेकर आएंगे।

आयोजक
वानप्रस्थ साधक आश्रम
आर्यवन, रोजड़, त.-तलोद, साबरकांठा, गुजरात-383307
दूरभाष – 9427059550, 8290896378