वैदिक धर्म प्रचार शिविर महाकुम्भ-2025, अरैल

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उ.प्र. आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में, जिला आर्य प्रतिनिधि सभा प्रयागराज के संयोजकत्व में वैदिक धर्म प्रचार शिविर

महाकुम्भ – 2025

स्थान – सोमेश्वर महादेव मंदिर के आगे, निषाद राज मार्ग, उत्तर पटरी, सेक्टर नं. 24, पीपा पुल नं0 3 के पास, अरैल

ओ३म् विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव।।

हे परमात्मा ! आप सब सुखों के दाता है। आप कृपा करके हमारे सम्पूर्ण दुर्गुण, दुर्व्यसन और दुःखों को दूर कर दीजिए। जो कल्याण कारक गुण कर्म, स्वभाव और पदार्थ है, वह सब हमको प्राप्त कराइये, से अधिक से अधिक आहुति देने का आग्रह किया है।

यज्ञ करने से परमात्मा का सानिध्य प्राप्त होता है और जीवात्मा (जीव+आत्मा) की शुद्धि पवित्रता व सदगति भी यज्ञ से होती है। प्रयाग का तात्पर्य भी यह है प्र+यारा अर्थात “जहाँ पर प्रमुखता से यज्ञ होता हो।

आर्य बन्धुओं,

सृष्टि के आरम्भ से ही भारत वर्ष में, महान ऋषि-मुनियों ने बड़े-बड़े यज्ञ गंगा-यमुना-अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर किया करते थे। जो आज भी जारी है। गीता में श्री कृष्ण ने कहा ‘सर्वगतम ब्रहम् नित्यम् प्रतिष्ठितम, सर्वव्यापी परमात्मा सदैव यज्ञ में प्रतिष्ठित है। आगे कहा कि तुम लोग इस यज्ञ के द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार निश्वार्थ भाव से एक दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे। आइये हम सभी आर्य, प्रयाग में होने जा रहे महाकुम्भ मेला 2025 “वैदिक धर्म प्रचार शिविर में देश-दुनिया से पधारे आचायर्यों एवं विद्वानों का ऐतिहासिक संगम के, गंगा तट पर माह भर चलेगा। आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है। शिविर में आपके ठहरने व भोजन की उचित व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।

वैदिक धर्म प्रचार शिविर – महाकुम्भ – 2025

प्रयागराज की पावन भूमि पर प्राचीन वैदिक यज्ञ अग्नि को पुनः प्रज्ज्वलित करते हुये महाकुम्भ – 12 जनवरी से 12 फरवरी तक, गंगा तट पर वेद मंत्रों से सात्विक यज्ञ करने के लिए हम, आप सभी आर्य (श्रेष्ठ) बन्धुओं को सादर आमंत्रित करते हैं।

वैदिक धर्म प्रचार शिविर – महाकुम्भ – 2025

(प्रतिदिन होने वाले कार्यक्रम)

प्रातः 9.00 बजे से 10.30 बजे – यज्ञ

प्रातः 11.00 बजे से 12.30 बजे – भजन / वैदिक प्रवचन

सायं 6.30 बजे से 9.30 बजे – यज्ञ/भजन/प्रवचन

नौट – प्रतिदिन दोनों समय होने वाले यज्ञ में यजमान बनने के लिए पहले से सूचित करना आवश्यक है। प्रतिदिन ऋषि लंगर (भंडारा) होगा।

संयोजकत्व – जिला आर्य प्रतिनिधि सभा – प्रयागराज

आयोजक मंडल

आर्य समाज चौक – प्रयागराज

आर्य समाज सिरसा प्रयागराज

आर्य लोक मण्डल प्रयागराज

आर्य समाज मुंडेरा प्रयागराज

स्त्री आर्य समाज चौक – प्रयागराज

आर्य समाज नैनी प्रयागराज

आर्य समाज रानी मण्डी – प्रयागराज

आर्य समाज झूसी – प्रयागराज

आर्य समाज कटरा प्रयागराज

आर्य समाज शंकरगढ़- प्रयागराज

आर्य समाज कल्याणी देवी प्रयागराज

आर्य समाज कीडगंज प्रयागराज

आर्य समाज खुल्दाबाद – प्रयागराज

वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय सिराथू, कौशाम्बी

आर्य समाज रम्मन का पूरवा प्रयागराज

वैदिक गुरुकुल संस्कृत विद्यालय सोरांव

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा-प्रयागराज

सतगुरू प्रसाद, सुनील धवन, सत्य स्वरूप जी, रामकुमार कबीर, सुरेन्द्र धवन, प्रयागदत्त गुप्ता, रवि शंकर पाण्डेय, रविन्द्र नाथ जायसवाल, प्रताप नारायण मिश्र, अरुणेश जायसवाल, मदन शर्मा, विजय जायसवाल, सुभाष जायसवाल, ए0के0 सिंह, राम सुरेमन, हीरा लाल आर्य, विजय बहादुर सिंह, शिव प्रसाद सिंह, अभिषेक यादव, श्याम जी. गुलाब जी, अवधेश यादव (पन्यू), सोम प्रकाश, वी०के० सिंह, पंकज शुक्ला, श्रीमती रंजना शोभति, श्रीमती रंजना शुक्ला, माधुरी जायसवाल, सीमा श्रीवास्तव, प्रियंका पान्डे, मन्जू त्रिपाठी, दीपिका केसरवानी, शैलेन्द्र गुप्ता, जगदीश राव अम्बेडकर, सोमेश्वर प्रसाद शास्त्री, संध्या आर्या।

शिविर संचालक-वीन्द्र नाथ जायसवाल

प्रताप नारायण मिश्र, प्रकाशचन्द्र जायसवाल, बी० के० सिंह, अंगद शुक्ला, पंकज शुक्ला, आदित्य अग्रवाल (दीपू), गुलाब चन्द्र केशरवानी, शिवांशु पाण्डेय, श्यामजी गुप्ता, अनिल श्रीवास्तव, सुरेश केसरवानी, आशीष गुप्ता, अजय कुशवाहा आदि

आर्य समाज के दस नियम

१. सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है।

२. ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है।

३. वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है।

४. सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोडने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिये।

५. सब काम धर्मानुसार, अर्थात् सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहिये।

६. संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है, अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।

७. सबसे प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार, यथायोग्य वर्तना चाहिये।

८. अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिये।

९. प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से संतुष्ट न रहना चाहिये, किंतु सब की उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिये।

१०. सब मनुष्यों को सामाजिक, सर्वहितकारी, नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिये और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतंत्र रहे।

निवेदक :

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा प्रयागराज

प्रधान- मा० शैलेन्द्र जी

पूर्व सांसद

मो. 9415217230

मंत्री

रविशंकर पाण्डेय

मो. 6388415770

कोषाध्यक्ष

प्रताप नारायण मिश्र

मो. 9956260368