वैदिक धर्म महोत्सव का भव्य आयोजन:वाराणसी

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Vaidik Dharm mahotsav Varanasi

वाराणसी चलो! महर्षि दयानंद सरस्वती जयन्ती एवं वैदिक धर्म महोत्सव

पूर्वी उत्तर प्रदेशीय आर्य समाज 150वां स्थापना वर्ष समारोह

दिनांक: 11, 12 एवं 13 अप्रैल 2025

स्थान: संत रविदास मंदिर, गंगातट, राजघाट (समीप नमो घाट), वाराणसी

आह्वान एवं आमंत्रण

धर्म एवं राष्ट्र प्रेमी देवियों, सज्जनों एवं युवा साथियों !

वर्ष 2024-25 महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती तथा आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ के रूप में ऐतिहासिक रूप से मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर सार्वदेशिक सभा ने विश्वभर की आर्य समाज संस्थाओं, प्रांतीय सभाओं एवं आनुसंगिक संगठनों से भव्य कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है। इस आवाहन के उत्तर में विभिन्न स्थानों पर बड़े उत्साह के साथ आयोजन संपन्न हो रहे हैं, जिनमें भारी संख्या में आर्य जन सहभागिता कर रहे हैं।

महर्षि दयानंद के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों पर विशेष कार्यक्रमों की धूम है, और इसी क्रम में काशी (वाराणसी), जहाँ उनका प्रसिद्ध शास्त्रार्थ हुआ था, में भी एक भव्य आयोजन की योजना बनाई गई है।

विशाल एवं भव्य आयोजन का संकल्प

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा वाराणसी, आस-पास के जनपदों की आर्य समाज इकाइयों एवं उत्साही आर्यजनों के सहयोग से इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार, संगठनात्मक मजबूती और आर्य वीर दल के उत्थान हेतु मील का पत्थर साबित होगा।

महर्षि दयानंद सरस्वती के काशी शास्त्रार्थ की ऐतिहासिकता को ध्यान में रखते हुए, यह महासमागम तीन दिवसीय होगा, जिसमें—

  • प्रमुख आर्य विद्वानों के प्रवचन एवं वैदिक व्याख्यान
  • भजनोपदेशकों द्वारा भव्य भजन संध्या
  • आर्य वीर दल की संगठनात्मक कार्यशाला
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के श्रेष्ठ आर्य उपदेशकों, भजनोपदेशकों एवं वरिष्ठ आर्य कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह
  • वैदिक धर्म के प्रचार हेतु विशेष मंत्रणा सत्र

आयोजकों से अनुरोध है कि वे 10 से 13 अप्रैल तक कोई अन्य सामाजिक या व्यक्तिगत आयोजन न रखें और वाराणसी में इस महोत्सव में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें।

Vaidik Dharm mahotsav Varanasi 2025

विशेष आयोजन – ऐतिहासिक नौका विहार

महोत्सव के समापन के उपलक्ष्य में 13 अप्रैल 2025, रविवार सायं विशेष नौका विहार का आयोजन होगा। यह नौका विहार संत रविदास मंदिर से प्रारंभ होकर नमो घाट होते हुए सराय मोहन तक जाएगा। यह स्थान ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 1856 में महर्षि दयानंद सरस्वती ने यहाँ स्थित स्वामी भवानंद की गुफा में अपना प्रथम प्रवास किया था। नौका विहार के दौरान विभिन्न घाटों का दर्शन किया जाएगा और अंत में अस्सी घाट पर कार्यक्रम का समापन होगा।

समारोह को सफल बनाने के लिए आपका योगदान आवश्यक

इस महासमागम की सफलता हेतु निम्नलिखित घटक महत्वपूर्ण हैं—

  1. उच्चस्तरीय प्रवचन एवं व्याख्यान
  2. सार्थक मंत्रणा संगोष्ठी
  3. धन एवं संसाधनों की समुचित उपलब्धता
  4. अधिकतम आर्यजनों एवं जनसामान्य की उपस्थिति

इसलिए, प्रत्येक आर्यजन का कर्तव्य है कि वह तन, मन, धन और अधिकतम उपस्थिति से इस आयोजन को सफल बनाए।

संपर्क सूत्र एवं पंजीकरण

अपनी उपस्थिति की सूचना निम्नलिखित व्हाट्सएप नंबरों पर दें—

  • प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ (प्रधान) – 8052852321
  • रवि प्रकाश आर्य (मंत्री) – 8317001222, 9415389341
  • चंद्रपाल आर्य (प्रचार मंत्री) – 9005415334
  • दिनेश आर्य (उपप्रधान संचालक, पूर्व भारत) – 9335479095
  • सत्येंद्र आर्य (सह-संचालक, पूर्वी उत्तर प्रदेश) – 9336530474

आयोजक मंडल

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा, श्री ब्रह्मदत्त जिज्ञासु स्मारक पाणिनि कन्या महाविद्यालय, महर्षि दयानंद काशी शास्त्रार्थ स्मृति न्यास, सार्वदेशिक आर्य वीर दल, वाराणसी।

“आइए, इस वैदिक धर्म महोत्सव में भाग लें और सनातन आर्य मिशन में अपना योगदान देकर पुण्य के भागी बनें।”