उस प्रभु की है कृपा बड़ी

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उस प्रभु की है कृपा बड़ी

उस प्रभु की है कृपा बड़ी
याद कर ले – घड़ी दो घड़ी

घण्टी बज जाये कब कूँच की
मौत हर दम सिरहाने खड़ी

किन्हीं शुभकर्मों का फल है ये
तुझे मानव का चोला मिला
जो आया है जाएगा वो
बन्द होगा न ये सिलसिला
ग्रन्थों की कहती हर इक कड़ी
याद कर ले – घड़ी दो घड़ी
घण्टी बज जाये कब कूँच की
मौत हर दम सिरहाने खड़ी

इस जवानी पे इतरा न तू
बातों बातों में मुक(बीत) जाएगी
उभरा सीना – सिकुड़ जाएगा
और कमर तेरी झुक जाएगी
ले कर के चलेगा छड़ी
याद कर ले – घड़ी दो घड़ी
घण्टी बज जाये कब कूँच की
मौत हर दम सिरहाने खड़ी

जो करना है ले आज कर
कुछ खबर प्यारे कल की नहीं
मानव चोले को कर ले सफल
ढील दे इसमें पल की नहीं
टूट साँसों की जाये लड़ी
याद कर ले – घड़ी दो घड़ी
घण्टी बज जाये कब कूँच की
मौत हर दम सिरहाने खड़ी

घण्टी बज जाये कब कूँच की
मौत हर दम सिरहाने खड़ी

उपर्युक्त स्वर/लय में नीचे के पद को भी गया जा सकता है :–

भौतिकवादी चकाचौंध में,
भूल उसको न मतिमन्द तू
सच्चिदानन्द सुख कन्द की
जा शरण में ले आनन्द तू
“वीर” कवि जाये विपदा हड़ी
याद कर ले – घड़ी दो घड़ी