तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
थके पाँव हैं, दूर गाँव है
अब तो कृपा कर दो
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
याचक बन कर खड़ा हूँ द्वारे
दोनों हाथ मैं जोड़े
परम-पिता तुम को मैं जानूँ
पिता न बालक छोड़े
हम सब प्रभु जी करे अचर्ना
सबकी पीड़ा हर लो
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
इस देहि के मालिक तुम हो
तुमको सदा भुलाया
भरी जवानी मोल न जाना
सदा तुम्हें बिसराया
तेरे चरण ही मानसरोवर
अपनी शरण में ले लो
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
क्लेश-द्वेष से भरा ये मन है
मैला मेरा तन है
तुम कृपाला दीन-दयाला
तुमसे ही जीवन है
इस तन-मन को उपवन करने
का वरदान अमर दो
तुम करुणा के सागर हो प्रभु !
मेरी गागर भर दो
स्वर :- पूज्य स्वामी रामदेव जी मञ्च से










