तुम भूलना सब कुछ मगर, माँ-बाप को मत भूलना।

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तुम भूलना सब कुछ मगर, माँ-बाप को मत भूलना। माता-पिता

तुम भूलना सब कुछ मगर,
माँ-बाप को मत भूलना।
कर्जा बहुत माँ-बाप का,
सिर पर चढ़ा मत भूलना।।टेर ।।

मुखड़ा तुम्हारा देखने,
पूजे थे बहु-देवी देवता।
जन्मे तो सब हर्षित हुये,
इस बात को मत भूलना।।1।।

थाली बजा खुशियाँ मना,
एकत्र सबको कर लिया।
घर-घर फिर लड्डू बँटवाये,
स्नेह यह मत भूलना।।2।।

बचपन में जब रोगी हुआ,
कड़वी दवा माँ खवाती ।
टोना किया नजरें उतारी,
वह घड़ी मत भूलना।।3।।

माता के कपड़े कीमती,
मल-मूत्र से मैले किये।
धो-पोंछ कर छाती लगाया,
प्यार वह मत भूलना।।4।।

सरदी की ठण्डी रात में,
बिस्तर सभी गीले किये।
तब साफ कर सूखे सुलाया,
वह घड़ी मत भूलना।।5।।

गोदी बिठा कर ग्रास अपना,
तोड़ कर मुख में दिया।
तू उगल वापस थूक भरता,
वह समय मत भूलना।।6।।

माँ ने सिखाया बैठना तो,
तूं लुढ़क गिर जावता।
फिर बोलना चलना सिखाया,
वह समय मत भूलना।।7।।

अब तो बड़ी वार्ते बनाता,
देन यह माँ-बाप की।
तुम छेद मत करना कलेजे,
युग-युगों मत भूलना।।8।।

कमाया धन बहुत,
माँ-बाप को सुख न दिया।
धिक्कार है ऐसी कमाई,
बात वह मत भूलना।।9।।

धन से सभी वस्तु मिले,
माता-पिता मिलते नहीं।
नित शीश चरणों में झुकाओ,
वचन यह मत भूलना।।10।।

थी माता कैकेयी, पिता दशरथ,
वचन प्रभु टाला नहीं।
लंका विजय कर आ गये,
श्री राम को मत भूलना।।11।।

तुम भूलना सब कुछ मगर,
माँ-बाप को मत भूलना।
कर्जा बहुत माँ-बाप का,
सिर पर चढ़ा मत भूलना।।

सौ बात की एक बात – जिस घर में मां-बाप हँसते हैं, उसी घर में भगवान बसते हैं।