मेरा जन्म एक पौराणिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही धर्म और अध्यात्म के प्रति जिज्ञासा थी। लगभग 15 वर्षों तक विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतरों में भटकने के बाद भी मेरे मन में उठ रहे गहरे प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पा रहे थे।
फिर अप्रैल 2020, जब देश में कोरोना की पहली लहर के कारण लॉकडाउन लगा, तब ईश्वर की महती कृपा से एक सज्जन के माध्यम से महर्षि दयानंद सरस्वती रचित अमर ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
जैसे-जैसे मैं पढ़ता गया, मेरे मन में उठ रहे एक-एक प्रश्नों का समाधान मुझे इस ग्रंथ के पृष्ठों में मिलता गया। सत्यार्थ प्रकाश केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि मेरे लिए ज्ञान का अमूल्य खजाना सिद्ध हुआ। 40 दिनों में मैंने इसके 14 समुल्लास पूरे किए और उसी दिन से मैंने आर्यसमाज को आत्मसात कर लिया।
अगले एक वर्ष में मैंने ऋषिकृत अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया और वैदिक विचारधारा से पूर्णतः जुड़ गया।
फिर एक दिन मैंने निश्चय किया कि मैं अपनी संतानों को वैदिक शिक्षा ही दूँगा। मेरी तीन बेटियाँ हैं। मार्गदर्शन के लिए कुछ आर्य विद्वानों से संपर्क हुआ और उनके माध्यम से मुझे ‘आर्य कन्या गुरुकुल शिवगंज’ की जानकारी मिली।
मैं अपनी बड़ी पुत्री सुमन पुरोहित, जो कक्षा 6 तक अहमदाबाद के अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल में पढ़ चुकी थी, के लिए एक ऐसे ही आदर्श वैदिक गुरुकुल की तलाश में था। जून 2022 में मैंने उसका आर्य कन्या गुरुकुल शिवगंज में प्रवेश करवा दिया।
इस गुरुकुल की प्रमुख आचार्या डॉ. सूर्या देवी चतुर्वेदा वेद एवं संस्कृत व्याकरण की अत्यंत विदुषी हैं, जो स्वयं प्रतिदिन कन्याओं को शिक्षा देती हैं। गुरुकुल का पाठ्यक्रम अति श्रेष्ठ है, जिसमें वैदिक वाङ्मय, उपनिषद्, दर्शन, पाणिनि व्याकरण जैसे विषय गहराई से पढ़ाए जाते हैं।
इसके साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। यहां कन्याओं के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास का पूर्ण ध्यान रखा जाता है।
योग, व्यायाम, खेलकूद, लाठी, भाला, कराटे, संगीत, यज्ञ, संध्या आदि का नियमित अभ्यास करवाया जाता है। छात्राओं की प्रतिभा को तराशकर उन्हें प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु बाहर भेजा जाता है।
आज इस गुरुकुल से शिक्षित अनेक बालिकाएँ सरकारी सेवाओं और समाज सेवा के क्षेत्रों में ऊँचे पदों पर कार्यरत हैं। यह सब आचार्या सूर्या देवी जी के अथक परिश्रम, आत्मविश्वास और तपस्विनी जीवन का परिणाम है।
गुरुकुल का शुद्ध वातावरण, सात्विक भोजन, वैदिक अनुशासन, पवित्र आचरण और शुद्ध संस्कार, इसे एक संपूर्ण आदर्श शिक्षा संस्थान बनाते हैं।
मैं निःसंकोच कहता हूँ कि मैं अत्यंत भाग्यशाली हूँ, जो मेरी पुत्री इस गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण कर रही है।
हर सनातनी माता-पिता को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे अपनी संतान को वैदिक शिक्षा देंगे। और इसके लिए आर्य कन्या गुरुकुल शिवगंज जैसा गुरुकुल ही एकमात्र श्रेष्ठ विकल्प है।
अरविन्द पुरोहित
B301, बापश्री पाम सोसायटी, विराटनगर रोड, मनमोहन,
निकोल, अहमदाबाद-382350 (गुजरात)
संपर्क : 9328118472
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