तव वन्दन हे नाथ !

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तव वन्दन हे नाथ !

तव वन्दन हे नाथ।
करें हम ॥ टेक ॥

सायं प्रातः तुझको ध्यावें,
भवसागर से पार तरें हम।

तव रचना से शिल्पी बनकर,
सांसारिक सुख भोग करें हम।

भारत जननी की सेवा का,
व्रत भारी व्रतनाथ! करें हम।

माता का दुःख हरने के हित,
न्यौछावर निज प्राण करें हम।

पाप शैल को तोड़ गिरावें,
वेदाज्ञा इक शीश धरें हम।

राग-द्वेष को दूर भगाकर,
प्रेम मन्त्र का गान करें हम।

फूले दयानन्द की फुलवारी,
विद्या मधु का पान करें हम।