हालत हमारे देश की जिसने ख़राब की।

हालत हमारे देश की जिसने ख़राब की।

शराब की नदियाँ चार मुक्तक (रुबाईयाँ) १. हालत हमारे देश की जिसने ख़राब की।ऐसी ख़राब की है कि बस बेहिसाब की।बहती थीं...