सृष्टि रचना

दुनिया की हर वस्तु भगवन्, तेरी याद दिलाती है।

दुनिया की हर वस्तु भगवन्, तेरी याद दिलाती है। दुनिया की हर वस्तु भगवन्,तेरी याद दिलाती है।पत्ता-पत्ता, डाली-डाली,तेरे ही गुण गाती...
विश्वपति जगदीश तुम,तेरा ही ओम् नाम है, विश्वपति जगदीश तुम,तेरा ही ओम् नाम है,मस्तक झुका के प्रेम से,ईश्वर तुम्हें प्रणाम है। सृष्टि...
कैसा सुन्दर जगत रचाया है तूने भगवान। कैसा सुन्दर जगत रचाया है तूने भगवान।करते हैं तेरा गुणगान, करते हैं तेरा गुणगान...
कर दी जगत की रचना, बिना हस्त बिना भाल कर दी जगत की रचना,बिना हस्त बिना भाल,हे सृष्टि के रचयिता,तूने कर...
दुनियाँ बनाने वाले,कैसी तेरी माया है। दुनियाँ बनाने वाले,कैसी तेरी माया है।कहीं बरसात, कहीं धूप,कहीं छाया है।कहीं बरसात, कहीं धूप……।।1।। पर्वतों की...
ईश्वर बिना विचारिये, सृष्टि रचाये कौन ? ईश्वर बिना विचारिये, सृष्टि रचाये कौन ?नियमों में प्राणीमात्र को, क्रम से चलाये कौन...
सत्ता तुम्हारी भगवन् जग में समा रही है। सत्ता तुम्हारी भगवन् जग में समा रही है।तेरी दया सुगन्धि हर गुल से...