समय पुकार रहा है।

उठो दयानन्द के सिपाहियों, समय पुकार रहा है।

उठो दयानन्द के सिपाहियों, समय पुकार रहा है। उठो दयानन्द के सिपाहियों,समय पुकार रहा है।देशद्रोह का विषधर फन,फुला फुंकार रहा है।...
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